अफसरी संरक्षण: जिस पर कार्रवाई कर जेल भेजना था, उसे कालोनी विकसित करने का अवसर दिया
माफ़िया के हौसले : अपराध करने पर सरकारी महकमे से डरना चाहिए लेकिन माफिया के हौसले है कि विकास अनुमति के लिए कॉलोनी सेल (कलेक्ट्रेट ) में आवेदन कर दिया ! विवाद आया तो सिर्फ आवेदन निरस्त किया, कोई कार्रवाई नहीं की !
इंदौर ( जनहित मीडिया )। जिले की राऊ तहसील के रंगवासा गांव की बेशकीमती सरकारी जमीन पर कॉलोनी काटने की जुर्रत करने वाले भूमिया से पूरे राजस्व अमले की सांठगांठ अब उजागर हो चुकी है। पिछले 2 वर्ष से अधिक समय से यह मामला विवाद में है और हल्का में अब तक रहे सभी पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर की जानकारी में है। बावजूद इसके भूमाफिया पर कार्रवाई नहीं की गई। सरकारी जमीन कब्जाने वाला न केवल खुला घूम रहा है बल्कि जमीन पर पसारता जा रहा है और सड़क, गेट आदि नए निर्माण भी कर रहा है। 
एक ओर प्रदेश के मुखिया मोहन यादव द्वारा सभी शासकीय जमीनों को कब्जा मुक्त कर शासन के अधीन लेने की मुहिम चलाने के आदेश दिये गए हैं, वहीं इंदौर में सरकारी जमीनों पर कब्जा करने के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। इंदौर में बेशकीमती सरकारी जमीनों पर माफियाओ की गिद्ध नजर है और सरकारी अमला भी प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष सहयोग कर रहा है। ऐसा ही एक मामला राऊ तहसील के रंगवासा गांव का है। यहां सर्वे क्रमांक 1 और 4 की बेशकीमती 19.470 हेक्टेयर शासकीय जमीन है। कई बरसों से खाली पड़ी इस सरकारी भूमि पर एक हिस्से में प्रधानमंत्री आवास योजना की कुछ इमारतें बनी है वहीं दूसरे हिस्से पर पत्थर के पहाड़ खड़े थे और तालाब था, जिन्हें समतल कर यहां कालोनी काटने की तैयारी कर ली है। किसानों को पट्टे पर दी गई सरकारी जमीन पर कॉलोनी काटने वाले राहुल तंवर की शिकायत कलेक्टर को करने के बाद भी वह अब तक इस जमीन पर काबिज है। इतना ही नहीं पिछले दिनों न्यायालय के रोक लगाने के आदेश के बावजूद यहां काम चल रहा है।
इस पूरे प्रखंड में सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि करीब 3 साल पहले यहां पेट खरीद प्राप्त किए गए जिसकी जिला प्रशासन को शिकायत की गई उसके बाद खरीदी बिक्री रोकना और कार्रवाई करना तो दूर इस जमीन पर कॉलोनी काटने हैतु विकास अनुमति के लिए आवेदन कर दिया। इस पर अफसरों का तुर्रा यह कि उन्होंने विकास अनुमति का आवेदन निरस्त कर दिया। जबकि आवेदन करने वालो पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाना चाहिए।

अधिकारियों के दिए रास्ते से कोर्ट पहुंचा माफिया
सरकारी जमीन पर कॉलोनी काटने के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी कर विकास अनुमति के लिए आवेदन दिया जिसे कॉलोनी सेल द्वारा निरस्त कर दिया इसी आधार पर भूमाफिया ने कोर्ट में अपील कर दी और फसरों के सहयोग से खुद को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत कर दिया। हालांकि अभी मामला विचाराधीन है।
ऐसे कब्जाई बेशकीमती सरकारी जमीन
रंगवासा की बेशकीमती शासकीय जमीन को 1970 के दशक में तात्कालिक तहसील कार्यालय में कालम 12 में नाम चढ़ा दिया बाद में इसको आधार बनाकर श्री गणेश सामूहिक भूमिहीन कृषि सहकारी संस्था का नाम चढ़ाया। फिर संस्था ने 18 सदस्यों को पट्टे देने के लिए कलेक्टर को आवेदन दिया । पट्टे के लिए आवेदन आने पर कलेक्टर ने संबंधित तहसीलदार को फाइल भेजी कि 18 पट्टे देने की प्रक्रिया करें, लेकिन तहसीलदार ने चमत्कार दिखाया और किसानों को पट्टेदार न बनाते हुए सीधे बटांकन कर दिया।
नामांतरण निरस्त, अवैध घोषित, कोर्ट और EOW में भी प्रकरण, फिर भी कब्जा
पूर्व में तहसीलदार द्वारा किए गए बटवारा को वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा नेनिरस्त करने के आदेश दिए हैं। जबकि भूमाफिया राहुल तंवर का नामांतरण आवेदन भी पूर्व में निरस्त हो चुका है। कई वर्षों से चल रही गड़बड़ी सामने आने पर ईओडब्लू ( आर्थिक अपराध शाखा ) में भी प्रकरण दर्ज कर लिया है और जांच एजेंसी ने संबंधित अधिकारियों से दस्तावेज मांगे हैं। संबंधित जमीन पर भू माफिया का नाम नहीं है, लेकिन कालोनी का काम धड़ल्ले से चल रहा है।

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Server Time : June 17, 2026 1:21 am