नवागत एसडीएम ने चार्ज लेते ही की कार्रवाई, कालोनी का काम रुकवाकर बेशकीमती सरकारी जमीन बचाने की दिशा में बढ़ाया कदम
इंदौर ( जनहित मीडिया )। शहर के समीप रंगवासा की सर्वे क्रमांक 1 और 4 की वेशकीमती जमीन पर भूमाफियाओं द्वारा कॉलोनी काटने की शिकायत और समाचार पत्रों में खबरों के बाद अपर कलेक्टर ने कॉलोनी को अवैध घोषित कर दिया था। लेकिन कार्रवाई नहीं होने से भूमिया कॉलोनाइजर के हौसले बुलंद थे, लगातार कॉलोनी का काम चल रहा था। आज 18 जुलाई को नवागत एसडीएम ने त्वरित कार्रवाई कर कॉलोनी में चल रहे काम रुकवा दिए है।

राऊ तहसील के रंगवासा की सर्वे क्रमांक 1 और 4 की वेशकीमती शासकीय कृषि पट्टे की जमीन को लेकर चली शिकायत और खबरों के बाद कालोनी की विकास अनुमति नहीं दी गई और सरकारी जमीन पर काटी जा रही कालोनी को अवैध घोषित कर दिया था। लेकिन प्रशासन द्वारा आगे कार्रवाई नहीं की गई और भूमाफिया कॉलोनाइजर द्वारा न्यायालय को गुमराह कर प्रशासन के काम में अड़ंगा जरूर लगाए, लेकिन आज शासकीय जमीन को बचाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक कदम बढ़ाया और कई महीनो से चल रहे कालोनी विकास के काम एसडीएम लोकेंद्र सिंह सरल ने रुकवा दिए। नए एसडीएम के सामने मामला आते ही उन्होंने तहसीलदार को मौके पर भेजकर काम बंद करवाया।
आते ही शासन के हित में कार्रवाई
हाल ही में राजस्व अधिकारियों के प्रमोशन और तबादले हुए हैं। इन तबादलों में डिप्टी कलेक्टर लोकेंद्र सिंह सरल को सरकार ने इंदौर भेजा। सरल ने इंदौर में चार्ज लेते ही बेशकीमती सरकारी जमीन को भूमाफिया के चंगुल से छुड़ाने की दिशा में निर्णय लेते हुए काम रुकवा दिया है।

सरकार के हाथ से ऐसे फिसली थी सरकारी जमीन
पहले रंगवासा की सर्वे क्रमांक 1 और 4 की जमीन शासकीय थी 1978 में एक संस्था का नाम दर्ज किया गया, लेकिन किस आदेश के आधार पर नाम दर्ज हुआ उसका रिकॉर्ड नहीं है। कुछ वर्ष में संस्था परिसमापन में चली गई और सहकारिता अधिकारियों ने संस्था की तरफ से जमीन को वापस शासन को लौटा दिया और संस्था का पंजीयन रद्द कर दिया। संस्था समाप्त होने के बाद संस्था के 18 सदस्यों का बटवारा कर 2003 में जमीन पर किसानों के नाम चढ़ा दिया। बाद में इन्हीं किसानों ने जमीन बेच दी जबकि किसान जमीन मालिक कैसे बने यह आज भी जांच का विषय है। किसानों का मालिकाना हक अवैधानिक था ।
डराने के प्रयास भी जारी !
रंगवासा की सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए जब जनहित मीडिया ने आवाज उठाई तो पहले धन और बलपूर्वक आवाज दबाने का प्रायस किया। जब बात नहीं बनी तो वकील का नोटिस भेजकर डराने और दबाव बनाने का प्रयास किया, लेकिन डर काम नहीं आया। जल्दी ही अन्य परते भी खुलेगी और शासन के हित में काम होगा।

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