सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद पुरानी तारीख के पैपर बनाकर सैकड़ों प्लॉट कब्जा करवाए
जमीन खोरो का अड्डा बन गई है गांधी नगर संस्था
पुरानी तारीख में आवंटन बनाकर जमीन खाने की साजिश
इंदौर (जनहित मीडिया )। सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना लागू होने के बाद गांधीनगर संस्था और इंदौर विकास प्राधिकरण के बीच विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि स्थिति यथावत रखी जाए। कोर्ट के आदेश पर इंदौर विकास प्राधिकरण ने तो अपना काम रोक दिया लेकिन गांधीनगर गृह निर्माण संस्था की आड़ में बैठे जमीन खोर भूमाफियाओ ने अपना धंधा जारी रखा और पुरानी तारीखों में संस्था के कागज तैयार कर जमीनों पर कब्जे करवा दिए हैं। 2 दशक से चल रहे भ्रष्टाचार में फूलचंद पाण्डे, नरेंद्र बक्षी और अंतर पटेल की भूमिका महत्वपूर्ण है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करवाने वाले जिम्मेदार तहसीलदार, एसडीम, कलेक्टर, क्षेत्र की पुलिस और आईडीए के अधिकारी सब खामोश मूकदर्शक बने हुए हैं।


करीब चार- पांच दशक पहले ही गांधीनगर संस्था के पुराने सदस्यों को प्लांट आवंटित कर गांधीनगर पूरा बसाया जा चुका था, लेकिन गांधीनगर संस्था में बैठे भूमाफियाओं ने आसपास की जमीन पर कब्जा करने की नीयत से संस्था के दायित्वों की आड़ में जमकर जमीन की कालाबाजारी की है। गांधीनगर संस्था जमीन घोटाले की खदान है, लेकिन सबसे आश्चर्यजनक विडंबना यह है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के स्टे के बावजूद आइडिया की योजना वाले क्षेत्र में गांधीनगर संस्था के माफिया ने प्लॉट कब्जे करवाकर निर्माण करवा दिए है। जमीन के नाम पर लार टपकाने वालो ने संस्था से पुरानी तारीख में आवंटन बनाकर खूब जमीन कब्जा करवाई है। फिलहाल विवादित भूमि पर सुप्रीम स्टे के बावजूद संस्था की आड़ में कब्जे हो चुके हैं। सबसे आश्चर्य की बात यह है 50 साल में जिन सदस्यों ने कभी अपने प्लॉट की तरफ झांककर नहीं देखा वे सब अब अचानक कुछ महीनों में ही पुराने आवंटन लेकर भूखंडों पर कब्जा लेने आ गाए और वो भी विवादित क्षेत्र में ही।
दरअसल 2003 में पूर्व अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ला के बाद 2003 के बाद के सभी अध्यक्षों ने मिलकर दूसरा गांधीनगर बना दिया है। शुक्ला के कार्यकाल 2003 तक कुल 510 प्लॉट आवंटित किए गए थे, जबकि 2003 के बाद अलग अलग अध्यक्षों के कार्यकाल में करीब 400 प्लॉट अवैध तरीके से बेचे गए हैं। संक्षिप्त जांच हो तो सब सामने आ जाएगा।
स्टे आदेश आते ही बाहर निकले मालिक
गांधीनगर संस्था के वह पुराने सदस्य जिनके पास कई वर्षों पहले के आवंटन थे, वे कोई भी 2024 तक आवंटन पत्र लेकर कभी सामने नहीं आए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का स्टेट आने के बाद अचानक ढेर सारे ऐसे सदस्य बाहर आए जिन्हें सुपर कॉरिडोर के पास प्लॉट दिए थे। अब सवाल यह है कि जिस समय क्या आवंटन बताया जा रहे हैं तब से अब तक के सदस्य कहां थे इन्हें संस्था ने रजिस्ट्री क्यों नहीं की बिना रजिस्ट्री के कब्जे कैसे दिए जा रहे हैं और सबसे खास बात यह भूमि गांधीनगर के नक्शे में भी नहीं है तो यहां प्लॉट कैसे दिए ?
दरअसल यह पूरी तरह से फर्जीबाड़ा है और पुरानी तारीख में कुछ महीनों पहले ही आवंटन बनाये गए हैं। संस्था के प्रबंधक और फर्जीवाड़े की पिक्चर मुख्य कलाकार पूर्व प्रबंधक फूलचंद पांडे ही है।
सड़क ( स्कीम 151 ) बनी लेकिन दूसरी योजना में अड़ंगा
सुपर कॉरिडोर से लगी बांगरदा की सर्वे क्रमांक 717 स्कीम नंबर 151 ( सुपर कॉरिडोर ) और स्कीम नंबर 169 बी में शामिल करने के बाद सुपर कॉरिडोर तो बन गया लेकिन इंदौर विकास प्राधिकरण की सड़क ( सुपर कॉरिडोर ) के दोनों तरफ की योजना क्रमांक 169 बी में जमीन पर कब्जा जमा लिया।

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