स्वतंत्रता दिवस के कुछ दिन पहले आज ही के दिन 22 जुलाई 1947 को इसे अंकगीकृत किया गया था।
नई दिल्ली (जनहित मीडिया)। राष्ट्रीय तिरंगा को आज 89 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। आज ही के दिन 1947 में शौर्य, शांति और प्रकृति के तीन रंग और प्रगति, न्याय और निरंतर आगे बढ़ने के प्रतीक अशोक चक्र से सुशोभित देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को अंगीकार किया गया था। तब से आज तक लोकसभा, विधानसभा और सचिवालयों से लेकर सभी संस्थानों में गर्व से फहराया जाता है।

आराष्ट्र ध्वज ज 79 वर्ष का हुआ भारत का राष्ट्रीय ध्वज केवल तीन रंगों से बना एक झंडा नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम, लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का प्रतीक है। भारतीय तिरंगा सिर्फ एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, शौर्य, बलिदान, एकता, लोकतंत्र और स्वाभिमान की अमर पहचान है। 1947 से अब तक हर वर्ष 22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण दिवस (National Flag Adoption Day) मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1947 में संविधान सभा ने सर्वसम्मति से तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया था। समिति ने यह ऐतिहासिक निर्णय देश की स्वतंत्रता से लगभग तीन सप्ताह पहले लिया गया था। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को भारत के आजाद होने के साथ ही गहराया यह तिरंगा स्वतंत्र राष्ट्र की आधिकारिक पहचान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन गया। अब सभी शासकीय कार्यालय और संवैधानिक संस्थाओं के कार्यालय में तिरंगा फहराया जाता है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले का वो ऐतिहासिक फैसला
22 जुलाई 1947 को संविधान सभा की बैठक में राष्ट्रीय ध्वज को अपनाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। उस समय देश स्वतंत्रता की दहलीज पर था और एक ऐसे ध्वज की आवश्यकता थी जो पूरे भारत की पहचान बन सके। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रीय ध्वज संबंधी प्रस्ताव संविधान सभा में रखा, जिसे सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज का दर्जा मिला।
पिंगली वेंकैया ने किया तैयार, सभी ने स्वीकारा
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की मूल अवधारणा का श्रेय स्वतंत्रता सेनानी और ध्वज विशेषज्ञ पिंगली वेंकैया को दिया जाता है। उन्होंने विभिन्न स्वरूपों पर लंबे समय तक अध्ययन किया और महात्मा गांधी सहित कई राष्ट्रीय नेताओं के सुझावों के आधार पर ध्वज का प्रारूप तैयार किया। समय-समय पर इसमें कुछ बदलाव किए गए। स्वतंत्रता से पहले ध्वज में चरखा अंकित होता था, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज अपनाते समय उसकी जगह अशोक चक्र को शामिल किया गया, ताकि यह पूरे राष्ट्र की समान पहचान और निरंतर प्रगति का प्रतीक बन सके।
ध्वज सम्मान के लिए कानून भी बनाया
राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान बनाए रखने के लिए भारत में फ्लैग कोड ऑफ इंडिया, 2002 लागू है। इसके तहत राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन, फहराने, उपयोग और संरक्षण से जुड़े नियम निर्धारित किए गए हैं। समय-समय पर इनमें संशोधन भी किए गए।
सम्मान के लिए ये सावधानी जरूरी है
फ्लैग कोड के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को सदैव सम्मानजनक स्थिति में रखा जाना चाहिए। ध्वज को जमीन पर नहीं गिराना चाहिए, उसे किसी प्रकार की सजावट या व्यावसायिक उपयोग के लिए अनुचित तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता और क्षतिग्रस्त या फटे हुए ध्वज का प्रदर्शन नहीं किया जाना चाहिए।

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