120 संस्थाओं में 10 वर्षों से नहीं हुए चुनाव, प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं संचालन
इंदौर ( जनहित मीडिया )। बड़ी बैंक और किसानों के बीच की कड़ी का काम करने वाली इंदौर की कई बी पैक्स ( बहु उद्देशीय कृषि साख ) संस्थाओं में पिछले कई वर्षों से चुनाव नहीं होने के कारण इन संस्थाओं में सहकारिता विभाग के अधिकारी प्रशासक बने हुए हैं। संस्थाओं का कार्य ग्रामीण क्षेत्र में है और काम की अधिकता भी रहती है। ऐसे में इन संस्थानों में संचालक मंडल और प्रबंधक होना जरूरी है जिससे संस्थाएं और किसानों के हित के निर्णय तुरंत लिए जा सके। लेकिन करीब 120 संस्थानों में पिछले 10 वर्षों से चुनाव नहीं हुए हैं।

पूरे मध्यप्रदेश में सबसे अधिक सहकारी संस्थाएं इंदौर में पंजीकृत हैं। विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाली सहकारी संस्थाओं में यहां बड़ी संख्या में कृषकों के हित के लिए कार्य करने वाली बहुउद्देशीय ग्रामीण प्राथमिक संस्थाएं भी कार्यरत हैं। किसानों को खाद-बीज और ऋण आदि सुविधाएं उपलब्ध करवाने वाली इन संस्थाओं में दो बार का संचालक मंडल का चुनाव नहीं करवाने से सहकारिता अधिकारियों पर इन संस्थाओं का अतिरिक्त भार है। इंदौर जिले में कार्यरत 120 संस्थाओं मे वर्ष 2016 से अब तक चुनाव नहीं हुए हैं। बताया जाता है कि मध्यप्रदेश में ऐसी 4500 संस्थाएं हैं जिन्हें सहकारिता विभाग के अधिकारी संभाल रहे हैं।
2016 और 2021 में नहीं हुए चुनाव
इंदौर जिले में कार्यरत सभी 120 पैक्स संस्थाओ में 2016 से लेकर अब तक चुनाव नहीं हुए। जबकि प्रत्येक 5 वर्ष में चुनाव के अनुसार संचालक मंडल का कार्यकाल पूर्ण होने पर वर्ष 2016 फिर 2021 में चुनाव करवाना चाहिए था। जबकि अब तीसरे चुनाव का समय आ गया है।
नहीं है निर्वाचन प्राधिकारी
सहकारिता विभाग में पंजीकृत सभी संस्थाओं का चुनाव कार्यक्रम निर्वाचन प्राधिकारी भोपाल द्वारा तय किया जाता है। लेकिन पिछले 6 महीने से अधिक समय से भोपाल में निर्वाचन प्राधिकारी का पद खाली होने से कई संस्थाओं के चुनाव अटक गए हैं।


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