वंदे मातरम की रचना को 150 वर्ष पूर्ण हो चुके है। इन 150 वर्षो में वंदे मातरम गीत ने पूरे भारतवर्ष को ना केवल गुलामी से आजादी दिलाई बल्कि देशभक्ति की अलख भी जगाई है।
कभी अंग्रेजो के अत्याचार के खिलाफ लड़ना हमारे लिए इस गीत का उद्देश्य था तो आज यह हमारे गौरव का गीत है। हमारी भारत माता के रूप की व्याख्या करने वाला गीत है जो हमे देशभक्ति के साथ अपने देश के गौरव को महसूस करने का गीत है। इस गीत की लय आज भी अदभूत है। इस खास मौके पर देशभर में लोग देशभक्ती से भरे इस गीत को गुनगुना रहे हैं। स्कूल और कॉलेज खास कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। देश के अलग अलग हिस्सों में खास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी तारत्मय में इंदौऱ शहर की शान राजवाड़ा पर वंदे मातरम गान का सामूहिक आयोजन किया गया जिसमें शहर के जनप्रतिनिधी सहित शहरवासियों ने उत्साह से भाग लिया।
नृत्यांगना रागिनी मक्खर की विशेष प्रस्तुति

वंदे मातरम गान के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आज विशेष आयोजन राजवाड़ा पर किया गया जहां देश भक्ति से कई लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए और सामूहिक राष्ट्रगान किया इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने देश भक्ति के गानों पर विशेष प्रस्तुति दी वहीं शहर की प्रख्यात नृत्यांगना रागिनी मक्खर द्वारा भी विशेष प्रस्तुति दी गई इस दौरान सिख समाज के लोगों ने देश भक्ति पंजाबी गानों पर जमकर थिरके। इस दौरान विधायक गोलू शुक्ला अपने आप को रोक ना सके और मंच पर थिरकते नजर आए चर्चा में कैलाश विजयवर्गी ने कहा कि वंदे मातरम एक मंत्र है हमारे क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम को आधार मानकर फिरंगियों से लड़ाई लड़ी वंदे मातरम एक राष्ट्र भक्ति का मंत्र है जो राष्ट्रभक्ति की ज्वाला फैलता है और इस आंदोलन में वंदे मातरम की बहुत बड़ी भूमिका रही हम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं
वंदे मातरम का मतलब क्या है?
वंदे मातरम का मतलब है, ‘मैं मां को नमन करता हूं’ या भारत माता मैं तेरी स्तुति करता हूं। वंदे संस्कृत का शब्द है और इसका मतलब है नमन करना, मातरम- इंडो यूरोपीय शब्द है जिसका मतलब है मां। यानि मां को नमन करता हूं। इस गीत को भारत माता का गीत कहा जाता है और मातृभूमि के प्रति सम्मान जताने के लिए इसे गाया जाता है। जब वंदे मातरम गीत बजता है तो भारतवासी भारत माता का नमन करते हैं और देशभक्ति की भावना से भर जाते हैं।
वंदे मातरम गीत किसने लिखा है?
वंदे मातरम गीत को महान साहित्य रचनाकार और स्वतंत्रता सेनानी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में इस गीत को लिखा था और 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में वंदे मातरम को पहली बार गाया गया था। ये गीत अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन का प्रतीक बन गया था। आजादी की लड़ाई लड़ने वाले हर देशभक्त की जुबान पर ये गीत चढ़ गया, यही वजह है कि अंग्रेजों ने वंदे मातरम गीत पर बैन लगा दिया था। आजादी के बाद 24 जनवरी 1950 में वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के तौर पर चुना गया।
कैसे हुई वंदे मातरम गीत की रचना?
इस गीत के लिखे जाने की पीछे की एक रोचक कहानी है। दरअसल अंग्रेजों ने इंग्लैंड की क्वीन के सम्मान वाले गीत- गॉड! सेव द क्वीन को हर कार्यक्रम में गाना अनिवार्य कर दिया था। जो बंकिम चंद्र समेत कई देशवासियों को पसंद नहीं था। बस यहीं से बंकिम चंद्र चटर्जी के अंदर भारत माता के लिए देशभक्ति का गीत लिखने की ललक जगी और उन्होंने 1874 में वंदे मातरम गीत की रचना की। इस गीत का भाव भारत भूमि को माता कहकर संबोधित करना है। 1882 में बंकिम चंद्र चटर्जी ने उपन्यास आनंदमठ में भी इस गीत को शामिल किया गया था।
पीएम मोदी ने किया ट्वीट
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि 7 नवंबर का दिन देशवासियों के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है। हम वंदेमातरम् गान के गौरवशाली 150 वर्षों का उत्सव मनाने जा रहे हैं। यह वो प्रेरक आह्वान है, जिसने देश की कई पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत किया है।


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