इंदौर। इंदौर और उज्जैन के बीच बन रही नई फोरलेन सड़क (Green Field Road) को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए निर्देश दिया है कि यह सड़क अब ऊंचाई पर (Elevated) नहीं, बल्कि जमीनी स्तर (Ground Level) पर बनाई जाएगी।
इस फैसले से इंदौर, सांवेर और उज्जैन के करीब 30 गांवों के सैकड़ों किसानों ने राहत की सांस ली है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट की पहल पर यह समाधान निकला है।
क्यों विरोध कर रहे थे किसान?
किसानों का कहना था कि अगर सड़क ज्यादा ऊंचाई पर बनती, तो बारिश का पानी खेतों में भर जाता, जिससे फसलें बर्बाद होतीं। गांवों के बीच आने-जाने का रास्ता बाधित हो जाता। मंत्री सिलावट ने इन समस्याओं को सीएम के सामने रखा, जिसके बाद भोपाल में हुई बैठक में सड़क का डिजाइन बदलने पर सहमति बनी।
₹626 करोड़ का मुआवजा:
परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बदले किसानों को मोटा मुआवजा दिया जा रहा है। कुल ₹626 करोड़ 49 लाख की राशि स्वीकृत की गई है। इससे 662 खातेदार और परिवार लाभान्वित होंगे। एसडीएम घनश्याम धनगर ने बताया कि किसानों को ज्यादा फायदा देने के लिए ‘बिक्री छांट’ (Sales Sorting) प्रक्रिया अपनाई गई है, ताकि उन्हें बाजार दर के अनुरूप दाम मिल सकें। मुआवजे से खुश किसानों ने गुरुवार को रेसीडेंसी कोठी पहुंचकर कलेक्टर शिवम वर्मा को साफा पहनाकर धन्यवाद दिया।
प्रोजेक्ट एक नजर में
यह सड़क आगामी सिंहस्थ 2028 के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है:
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लागत: ₹2935.15 करोड़।
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लंबाई: 48 किलोमीटर (इंदौर से उज्जैन)।
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अधिग्रहण: 203.649 हेक्टेयर जमीन।
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प्रभावित: सांवेर विधानसभा के 20 गांवों के लगभग 600 परिवार।


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