जप्त ठेले – गुमटी वापस क्यों नहीं ? नगर निगम पर मेहनतकशों की संपत्ति बेचने के आरोप, जांच की मांग
इंदौर (जनहित मीडिया )। नगर निगम द्वारा विभिन्न झोनों से जप्त किए गए रेडी-पटरी एवं ठेला व्यवसायियों के ठेले, गुमटी, काउंटर तथा अन्य व्यापारिक सामग्री के कथित विक्रय एवं नष्टिकरण को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। जब तो सामग्री को नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा नष्ट किया जा रहा है अथवा बेचा जा रहा है।

नगर निगम के अमले द्वारा जब्त की जाने वाली सामग्री को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश वर्मा ने निगम आयुक्त को शिकायत प्रस्तुत कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच एवं संबंधित अभिलेख सार्वजनिक किए जाने की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान जप्त की गई सामग्री को मानिक बाग ब्रिज के नीचे, सत्यम टॉकीज के सामने सहित अन्य स्थलों पर रखा गया था। मौके पर बड़ी संख्या में जप्त ठेले, काउंटर एवं अन्य सामग्री को तोड़े जाने तथा विक्रय किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह भी आरोप लगाया गया है कि अनेक मामलों में जप्त सामग्री के वास्तविक स्वामियों को उनकी संपत्ति वापस नहीं की जाती, जबकि वे निगम कार्यालयों में आवेदन प्रस्तुत कर अपनी सामग्री प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
वर्मा का कहना है कि रेहडी-पटरी एवं ठेला व्यवसायियों की संपत्ति उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन होती है। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित शुल्क या जुर्माना जमा कर अपनी सामग्री वापस लेना चाहता है, तो उसे विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत अवसर प्रदान किया जाना चाहिए। किसी नागरिक की संपत्ति को जप्त करने के बाद उसे वापस न करना तथा बाद में उसका विक्रय या नष्टिकरण करना गंभीर प्रशासनिक एवं कानूनी प्रश्न उत्पन्न करता है।
उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि यह सार्वजनिक किया जाए कि जप्त संपत्तियों की नीलामी अथवा विक्रय किस कानूनी प्रावधान के तहत किया जा रहा है, संबंधित आदेश, अनुबंध एवं स्वीकृतियां क्या हैं तथा पिछले वर्षों में कितनी सामग्री जप्त, वापस एवं विक्रय की गई है।
विक्रय व नष्ट करने पर लगे रोक
प्रेस को जारी बयान में कहा गया है कि जप्त सामग्री के संबंध में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा जांच पूरी होने तक जप्त संपत्तियों के विक्रय एवं नष्टिकरण की कार्रवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए। यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी अथवा ठेकेदार की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मामला सिर्फ सामग्री का नहीं
यह विषय केवल जप्त सामग्री का नहीं, बल्कि हजारों मेहनतकश रेडी-पटरी एवं ठेला व्यवसायियों की आजीविका, उनके संवैधानिक अधिकारों तथा प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। इसलिए पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के समक्ष लाई जानी चाहिए।


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