कृषि के विकास पर होगी चर्चा, पशु पालन, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण पर भी होगी चर्चा
इंदौर(जनहित मीडिया)। 20 वर्ष पुराने ब्रिक्स ( BRICS ) का भारत में चौथा सम्मेलन कल मंगलवार को इंदौर में आयोजित किया जाएगा। इसमें सभी सदस्य देश के कृषि मंत्री शामिल होंगे। इससे पहले तीन सम्मेलनों की अगवानी भारत कर चुका है यह चौथा सम्मेलन है जो कल इंदौर में आयोजित होगा। सम्मेलन में 20 देश के प्रतिनिधि शामिल होंगे जिसमें मंत्री और अधिकारी रहेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठक होगी तथा 12 एवं 13 जून को कृषि मंत्रियों की बैठक का आयोजन किया जाएगा।

भारत इस वर्ष वृक्ष की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में कल इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की एक बैठक आयोजित की जा रही है। बैठक के संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि 2006 में इसकी शुरुआत हुई थी और आज 11 सदस्य देशों में 10 साझेदार देशों के साथ यह विश्व का सबसे प्रभावशाली समूह बन गया है जो वैश्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि 68 प्रतिशत कृषि ज्योति और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन इन्हीं ब्रिक्स देश के पास है। कृषि मंत्री ने कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि पूर्व में भारत 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। कार्यक्रम से पहले चौहान अधिकारियों के साथ आठ बैठकें की है जिनमें खाद्य सुरक्षा, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे विषयों पर विचार विमर्श हुआ है। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की प्रत्येक नीति और नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले और बाजार तक उनकी पहुंच आसान हो, कृषि क्रेडिट का प्रभाव उनकी तरफ पड़े और किसने की आय, रोजगार, आजीविका के साथ सतत कृषि के विकास पर चर्चा होगी।
इस पर रहेगा फोकस
कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि विकास का वास्तविक अर्थ तभी सिद्ध होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी। इस बार मुख्य रूप से चार विषय- खाद्य सुरक्षा, पोषण एवं आजीविका, कृषि व्यापार एवं सहयोग और जलवायु अनुकूल एवं सतत कृषि तथा खाद्य प्राणियों के नवाचार पर साझेदारी को सशक्त बनाने का काम किया जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती
ब्रिक्स सम्मेलन की जानकारी के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन बड़ी वैश्विक चुनौती है इस पर बात करते हुए कृषि मंत्री ने पुणे योगी कृषि सतत पद्धतियों और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधा और तकनीक को छोटे किसानों तक पहुंचने पर जोड़ दिया। उन्होंने बताया कि इसी सिलसिले में 12 जून को लघु किसानों महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा विषय पर एक विशेष मंत्री स्तरीय संवाद भी होगा।

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