इंदौर: इंदौर की पहचान उसके औद्योगिक विकास से है, लेकिन अब यही उद्योग शहर की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। शहर के दक्षिण-पश्चिमी औद्योगिक क्लस्टर—विशेषकर पीथमपुर, सांवेर रोड और पालदा क्षेत्र—में उद्योगों द्वारा बहाए जा रहे रासायनिक अपशिष्ट (Chemical Waste) ने भूजल को जहरीला बना दिया है, जिससे स्थानीय रहवासियों में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
कहां और कैसे फैल रहा जहर?
स्थानीय नालों, खुले प्लॉटों और खेतों में औद्योगिक इकाइयों द्वारा सीधे केमिकल युक्त पानी छोड़ा जा रहा है।हॉटस्पॉट: पीथमपुर, सांवेर रोड और पालदा। ट्रीटमेंट के बिना वेस्ट को सीधे जमीन में उतारा जा रहा है, जिससे भूजल की ‘केमिकल प्रोफाइल’ बदल रही है।
बन रहे ‘बीमारी के क्लस्टर’: दूषित पानी और हवा का असर अब अस्पतालों के आंकड़ों में दिखने लगा है।स्थानीय लोगों में त्वचा रोग (Skin Diseases), पेट संबंधी गंभीर समस्याएं और सांस लेने में तकलीफ के मामले तेजी से बढ़े हैं। क्षेत्रीय अस्पतालों और पानी की सैंपलिंग से यह संकेत मिले हैं कि औद्योगिक डिस्चार्ज वाले इलाकों में बीमारियों के ‘क्लस्टर’ बन रहे हैं।
नोटिस और जुर्माने बेअसर?
प्रशासन की कार्रवाई “ढाक के तीन पात” साबित हो रही है। एमपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने समय-समय पर नोटिस, जुर्माने और क्लोजर आदेश जारी किए गए हैं। सांवेर और पालदा में कई इकाइयों पर कार्रवाई हुई, लेकिन वे दोबारा शुरू हो जाती हैं। एमपीआईडीसी (MPIDC) और उद्योग संघों ने निरीक्षण तेज करने का दावा किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर वेस्ट डंपिंग जारी है।
इस समस्या के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार हैं: कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की क्षमता अपर्याप्त है। कनेक्शन में तकनीकी दिक्कतें हैं। छोटी इकाइयां ट्रीटमेंट का खर्च बचाने के लिए शॉर्टकट अपनाती हैं। प्रशासनिक सख्ती का अभाव।
भविष्य की चेतावनी: विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह जहर न केवल पीने के पानी बल्कि खेती और खाद्यान्न की गुणवत्ता को भी हमेशा के लिए खराब कर देगा। यह आने वाले समय में इंदौर के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनने जा रहा है।


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Server Time : September 5, 2026 2:47 pm