बेबस जनता आईडीए और पुरानी तारीख में नक्शे बनवाने वालों की कठपुतली बनी
35000 ₹ में पुरानी तारीख में मेन्युअल नक्शा बनवाने का दावा
इंदौर। योजना क्रमांक 78 में लीज समाप्त होने के बाद अब वहां के भूखण्ड धारकों के लिए लीज रिन्यू करवाना बड़ी चुनौती बन गया है। जिसके चलते लोग ठगी के शिकार हो रहे हैं। लीज के लिए फर्जी नक्शे बनवाए जा रहे हैं। जिसका खामियाजा भविष्य में लीज धारक/प्लॉट धारक को भुगतना पड़ सकता है।
इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 78 की लीज अवधि खत्म होने के बाद अब रिलीज रिन्यू करने के लिए संपत्ति के दस्तावेजों के साथ निर्माण की अनुमति संबंधी दस्तावेज भी अनिवार्य है। लीज रिन्यू करवाने के लिए क्षेत्र में विकास प्राधिकरण और भूखंड धारकों के बीच फर्जीवाड़ा करने वालों ने पैठ बना ली है और पुरानी तारीख में नक्शा पास करवाने का आश्वासन देकर हजारों रुपए वसूले जा रहे है। दावा यह किया जा रहा है कि पूर्व में भी इस तरह के नक्शे बनवाकर लीज करवाई जा चुकी है।
इस मामले में हमने जांच-पड़ताल की, जिसमें योजना क्रमांक 78 में अटल खेल परिसर के पास पानी टंकी के पीछे की तरफ आश्रम फोटोकॉपी चलाने वाले दिनेश शर्मा (टोपी) द्वारा लीज रिन्यू करवाने के लिए मकान के पेपर देखने के बाद रजिस्ट्री और विकास प्राधिकरण के दस्तावेजों के साथ नक्शा भी मांगा गया, जब नक्शा नहीं होने की बात कही तो 35,000 रुपए में पुरानी तारीख में नक्शा बनाने की बात की। दलाल ने 2009 का एक नक्शा भी दिखाया और कहा कि इस तरह से पुरानी तारीख में नक्शा पास होगा।
अधिकांश प्लॉट पर अवैध निर्माण
इंदौर विकास प्राधिकरण ने योजना क्रमांक 78 में 12 बाय 32 के प्लॉट पर एक कमरा, किचन और लेट-बाथ बनाकर दिए थे। इसके बाद लोगों ने वहां बिना नक्शा परमीशन के दो-तीन और चार मंजिला मकान बना लिए। बिना नक्शा अनुमति के निर्माण के चलते अब प्लीज रिन्यू करवाने में समस्या आ रही है। ठगोरे दलाल इसी का फायदा उठाकर मोटी रकम ऐंठ रहे हैं।
कैसे बना नक्शा, कहां से आई निगम की सील
लीज रिन्यू करवाने के लिए दलाल दिनेश शर्मा से संपर्क किया तो उसने हमें परदेशीपुरा इलेक्ट्रॉनिक कंपलेक्स के पास बुलाया। 78 की एक संपत्ति के पेपर दिखाने के बाद उसने नक्शा बनवाने की बात कही और एक नक्शा दिखाते हुए कहा कि यह वर्ष 2009 की तारीख का है, लेकिन वास्तव में यह बना अभी है। उसने बताया कि वह 35 हजार रुपए में ऐसे ही पुरानी तारीख में नक्शा बनवा देगा। अब सवाल यह है की पुरानी तारीख में बनने वाले इन नक्शों में नगर निगम की सील कौन लगता है क्या विभाग का कोई आदमी मिला हुआ है या बाहर ही कोई गैंग कम कर रही है।
और सबसे बड़ी बात यह कि भविष्य में जांच हुई तो पैसा देकर भी सिर्फ संपत्ति धारक फंसेगा।
इस खुलासे के संबंध में दलाल से सबूत बातचीत की रिकॉर्डिंग हमारे पास है।



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