3000 से अधिक संस्थाओं वाले जिले में उपायुक्त प्रशासन और उपायुक्त न्यायालय के पद खाली, प्रदेश भर के संस्थाओ का निर्वाचन करवाने वाले निर्वाचन प्राधिकारी का पद भी खाली
इंदौर ( जनहित मीडिया )। सरकार ने सहकारिता विभाग के काम इतने कठिन कर दिए हैं कि अब संस्थाओं की कोई सुनने वाला भी नहीं है। इंदौर जिले में सहकारिता विभाग में मुख्य अधिकारी प्रशासनिक और न्यायिक उप पंजीयक (उपायुक्त) के रूप में दो पद हैं और दोनों पद पिछले कई महीनो से खाली है। जबकि एक पद सहायक आयुक्त का भी रिक्त है इसके अलावा प्रदेश भर की संस्थाओं के चुनाव करवाने वाले निर्वाचन प्राधिकारी की कुर्सी भी कई महीनो से खाली है।

आजादी के आंदोलन से लेकर देश की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सहकार का सरकार द्वारा कैसा कबाड़ा किया जा रहा है, इसका उदाहरण इंदौर से भोपाल तक खाली पड़े महत्वपूर्ण पद हैं। इंदौर जिले में सहकारिता विभाग में मुख्य अधिकारी के रूप में उपायुक्त के दो पद हैं। विभाग में सहकारिता उपायुक्त प्रशासनिक और सहकारिता उपायुक्त न्यायिक के पद पिछले कई महीनो से खाली हैं और दूसरे जिले में पदस्थ अधिकारी को जिले का प्रभार दिया है। उपायुक्त के रूप में धार में पदस्थ अधिकारी इंदौर में कुल दो दिन इंदौर के कार्यों को दिए जाते हैं, जबकि इंदौर में 3,000 से अधिक संस्थाएं पंजीकृत हैं और कार्य भी अत्यधिक है। बावजूद इसके जिले में दोनों महत्वपूर्ण पद खाली है।
निर्वाचन के लिए नहीं है प्राधिकारी
दरअसल पूरे मध्य प्रदेश की संस्थाओं में चुनाव करवाने के लिए भोपाल में पदस्थ निर्वाचन प्राधिकारी द्वारा चुनाव कार्यक्रम जारी किए जाते हैं लेकिन पिछले कई महीनो से सहकारिता विभाग मध्य प्रदेश में यह पद खाली है। अगस्त में सेवानिवृत्त आईएएस संजय गुप्ता की नियुक्ति हुई थी, लेकिन कुछ दिनों बाद ही वे रेरा में पदस्थ कर दिए गए और यह पद फिर से खाली हो गया है।

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