10 वर्ष में आधे से भी काम हो गई विज्ञापन, लाइसेंस, मार्केट और लीज की कमाई
इंदौर। पिछले कुछ वर्षों से नगर निगम इंदौर के संपत्ति कर में लगातार इजाफा हो रहा है और निगम की आय भी लगातार बढ़ रही है। लेकिन नगर निगम की आय के कुछ स्रोत ऐसे भी हैं जिनसे एक दशक में आधी से भी कम आमदनी रह गई है। 2013-14 में जो आए थे वह 2023- 24 तक आते-आते आधे से भी काम रह गई है।
इंदौर नगर निगम की कमाई का मुख्य स्रोत संपत्ति कर और जलकर ही है, लेकिन संपत्ति कर जलकर और स्वच्छता के अलावा अन्य कहीं स्रोत है जिससे नगर निगम की आई बढ़ाई जा सकती है। हालांकि पिछले एक दशक में इंदौर नगर निगम की कुछ आय के स्रोतों से बढ़ाने की जगह कम हुई है। मालूम हो कि नगर निगम के राजस्व विभाग में पहले विज्ञापन व्यवसायिक लाइसेंस मार्केट और लिस्ट पर दी हुई संपत्तियां से वित्तीय वर्ष 2013-14 तक 24 करोड रुपए से अधिक की आय होती थी। इन सभी विभागों का विलय करने के बाद अब इसे आय बढ़ाने की जगह काम हो गई है। जानकारी के अनुसार विज्ञापन लाइसेंस और मार्केट की कुल आय 10 करोड़ रुपए से भी कम रह गई है।
विलय किया था या साजिश
कुछ वर्ष पहले नगर निगम के कुछ विभागों का आपस में विलय करने की साजिश निजी वेंडर को फायदा पहुंचाया और निगम को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया गया। विज्ञापन लाइसेंस और मार्केट का विलय करने के बाद उक्त सभी स्रोतों से नगर निगम की आय पूरी तरह ठप्प हो गई है।
तो 100 करोड़ की कमाई होती
2014 के बाद नगर निगम की सीमा में विस्तार हुआ जिससे सड़कों पर लगे मार्ग संकेतकों और डिवाइडर तथा होर्डिग आदि से विज्ञापन की कमाई पहले की अपेक्षा दोगुना होने की संभावना थी। जो नहीं हो सकी। इसी तरह पिछले कुछ वर्षों में बाजार का भी विस्तार हुआ है। वर्ष 2013 की अपेक्षा आज इंदौर में दोगुनी से ज्यादा मार्केट और दुकानें हैं लेकिन नगर निगम की कमाई कम हुई है। अगर उक्त सभी स्रोतों से पूर्व की तरह आए होती तो यह कमाई 100 करोड रुपए से अधिक हो सकती थी।

Users Today : 5
Total Users : 16991
Views Today : 20
Total views : 30835
Who's Online : 0
Server Time : September 5, 2026 2:52 pm