ये कैसी नीति: अनुरोध यात्रा के लिए भीड़ जुटाई और सरकार से चर्चा बिना लौट आए
अपनी नेतागिरी चमकाने शिक्षकों को गुमराह कर भाषण बाजी, नारेबाजी की और राजधानी से बैरंग लौटे

इंदौर। शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में कल शनिवार को भोपाल के दशहरा मैदान पर प्रदेश भर से करीब एक लाख अध्यापक एकत्रित हुए थे। विभिन्न संगठनों के माध्यम से यह शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरुद्ध मोर्चा खुले हुए हैं और सरकार से अनुरोध करने गए थे कि वर्षों की नौकरी के बाद इस तरह के टेस्ट सही नहीं है और सरकार से बात भी करना था लेकिन अध्यापक संगठनों की आड़ में छुपे कुछ निम्न स्तरीय नेताओं ने इस कार्यक्रम को दोयम दर्जे का आंदोलन साबित कर दिया और लंबी भाषण बाजी कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अध्यापकों को गुमराह कर वापस लौटाए जबकि उधर मुख्यमंत्री अध्यापकों से मिलकर उनकी बात सुनने के लिए तैयार थे फिर भी अपने नेतागिरी चमकाने के लिए संगठनों के पदाधिकारी ने सरकार से बात करना उचित नहीं समझा।
कई वर्षों से बल्कि दो और तीन दशकों से स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों की पात्रता के लिए ली जाने वाली परीक्षा ( TET : teachers eligibility tast ) के विरोध में प्रदेशभर के अध्यापकों के संगठन और कर्मचारी एकजुट हुए और अनुरोध के लिए राजधानी भोपाल पहुंचे। प्रदेश भर के सभी जिलों से आए अध्यापकों ने इस अनुरोध यात्रा का नाम दिया और उद्देश्य था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उनसे अनुरोध किया जाएगा, लेकिन कुछ कथित नेताओं ने जो मजबूरी में इस आयोजन का हिस्सा बने थे उन्होंने पूरे कार्यक्रम को अपने कब्जे में ले लिया और कई घंटे तक भाषण बाजी कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की हजारों की संख्या में इकट्ठे हुए शिक्षकों को गुमराह किया और वापस लौट आए। न सरकार से मिले न उनसे मिलने के प्रयास किए। जबकि सरकार के एक अनुसांगिक संगठन ने मुख्यमंत्री को कार्यक्रम में लाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए मुख्यमंत्री की राजा मंडी भी ले ली थी लेकिन अध्यापक संगठनों से जुड़े कुछ नेताओं ने अपनी राजनीति चमका कर शिक्षा मंत्री को मंच पर सजाया और अध्यापकों को खूब भाषण पिलाकर वापिस ले आए।
कार्यक्रम में चंदे के करोड़ों खर्च
अध्यापकों की इस अनुरोध यात्रा में प्रदेश के सभी जिलों से अध्यापक एकत्रित हुए थे, कुछ लोगों की माने तो यह आंकड़ा एक लाख के करीब है। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और प्रदेश के सभी जिलों से स्वयं के खर्च से कार्यक्रम में पहुंचे अध्यापकों के खर्च का अनुमान 8 से 10 करोड़ रुपए है। इसके अलावा यह भी चर्चा है कि अध्यापक संगठनों के कुछ कथित नेताओं ने मंच पर बैठने की कीमत भी लगाई और 5o हजार रूपए तक वसूले है।
शिक्षकों के मंच पर बाउंसर
1 महीने से अधिक समय से आंदोलन की तैयारी की जा रही थी और कुछ दिनों में ही आंदोलन की अगवानी करने वाले नेता बदल गए। सिर्फ आंदोलन के नेता ही नहीं बदले बल्कि इसके साथ पूरी व्यवस्था और कार्यक्रम का प्रारूप भी बदल गया। अनुरोध यात्रा आंदोलन, भाषणबाजी और नारेबाजी में बदल गया वही पहले से अगवानी करने वाले संगठक मंच पर नहीं आए इसके लिए नेताओं ने वहां बाउंसर भी लगाए थे। शायद पहली बार शिक्षको के मंच पर रंगबाजी करते बाउंसर दिखाई दिए।
सीएम से क्यों नहीं मिले ?
प्रारंभ में जब तैयारी चल रही थी तो मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखने के लिए अनुरोध करना था और इसके लिए प्रयास किए थे। भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष माध्यम बने और मुख्यमंत्री से मुलाकात की व्यवस्था की गई, उसके लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से भी प्रोटोकॉल तैयार किया। बावजूद इसके कुछ नेताओं ने वहां सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने भाषणबाजी की, लेकिन मुख्यमंत्री को अपनी बात से अवगत नहीं कराया। कुल मिलाकर लंबे समय से अध्यापकों और अध्यापक संगठनों की जो तैयारी थी उसे चुनिंदा नेतागिरी करने वालों ने खत्म कर दिया।


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