इंदौर। कॉलोनी के विकास अनुमति के साथ-साथ ही नदी- नालों के लिए एनजीटी की गाइड लाइन के अनुसार जगह छोड़ना होता है लेकिन कॉलोनाइजर की जमीन की भूख ने नदी के बाद जमीन छोड़ना तो दूर नदीं की सीमा में जाकर दीवार बनाई और उससे लगी सड़क भी बना डाली। इतना ही नहीं बरसात में पानी के वैग से जब दीवार ढह गई तो फिर से नई दीवार खड़ी कर दी।इसकी शिकायत के बाद एमपीआईडीसी के नोटिस का जवाब तक नहीं दिया।
मामला देपालपुर तहसील के बेटमा बाईपास से लगी बेटमा खास की जमीन के खसरा नंबर 438/2/1/1, 438/2/1/2, 438/2/2, 437/2/2 एंव अन्य खसरों पर श्री बालाजी धाम के नाम से कॉलोनी विकसित की गई है। इसी कॉलोनी के पास से बालाजी नदी बहती है। जो यहां से प्रवाहित हो कर गंभीर नदी में मिलती है। इस प्राकृतिक जल स्त्रोत पर कॉलोनाइजर शेलेन्द्र अग्रवाल ने नदी की सीमा नें घूस कर बीच में ईंट सीमेन्ट की दीवार खड़ी कर दी।
नदी बहा ले गई दीवार
इसकी जिला प्रशासन एंव एमपीआईडीसी से शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई जिसके बाद सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की गई। लगातार शिकायतों के बाद भी नदी से कॉलोनाइजर का कब्जा नहीं हटा। प्रकृति ने खूद कब्जा हटाया और बरसात में नदीं के पानी के वैग में दीवार ढह गई। इसके बाद कॉलोनाइजर ने फिर से नदी में दीवार खड़ी कर दी। अब नदी की सीमा और इससे लगी हुई प्रतिबंधित 9 मीटर जमीन पर निर्माण कर लिया।
एमपीआईडीसी(मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेन्ट कार्पोरेशन) ने कॉलोनाइजर को शिकायत के बाद नोटिस भेजा जिसमें कॉलोनाइजर से जवाब मांगा गया कि आपके खिलाफ जो शिकायत प्राप्त हुई इसकी जांच में शिकायतकर्ता के द्वारा लगाए गए तथ्य सही है। जिस संबंध में आपका पक्ष रखे लेकिन कॉलोनाइजर शेलेन्द्र अग्रवाल के द्वारा उक्त नोटिस का जवाब अब तक नहीं दिया गया है।

कार्यपूर्णता का सर्टिफिकेट नहीं
इसके साथ ही कॉलोनाइज को कॉलोनी विकसित करने के दौरान जो कार्य करने होते है उसकी कार्य पूर्णता का सर्टिफिकेट भी लेना होता है लेकिन कॉलोनाइज के द्वारा उक्त कार्यपूर्णता का प्रमाणपत्र भी एमपीआईडीसी से नहीं लिया गया है। जब तक उक्त विभाग का कार्य पूर्णता का सर्टिफिकेट कॉलोनाइजर को नहीं मिला तब तक कालोनी में निर्माण कार्य शुरू नहीं होता थे। लेकिन इसके विपरित बालाजी धाम कॉलोनी में निर्माण कार्य शुरू हो गए है। इस पर एमपीआईडीसी के द्वारा नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया लेकिन कॉलोनाइजर के द्वारा उक्त नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया है।


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