दुर्ग: जेआरडी शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्य पर राज्य शासन ने कड़ी कार्रवाई की है. जेआरडी शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की प्राचार्य संगीता नायर को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया. निलंबन की कार्रवाई से स्कूल में हड़कंप मच गया है. प्राचार्य संगीता नायर के निलंबन का आदेश सोमवार को स्कूल शिक्षा विभाग ने जारी किया. निलंबन की कार्रवाई की संबंध में बताया गया कि उनके खिलाफ छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए हैं.
प्रिंसिपल संगीता नायर निलंबित: प्रिंसिपल संगीता नायर पर आरोप है कि उन्होने धार्मिक प्रतीकों पर विवादित टिप्पणी की है. स्कूल की प्रिंसिपल पर छात्रों का आरोप था कि उन्होने छात्रों को चोटी न रखने, हाथ में रक्षा सूत्र यानि मौली धागा न बांधने जैसी बातें कही. प्रिंसिपल की इन बातों से नाराज होकर छात्रों और उनके अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई. छात्रों और उनके परिजनों का आरोप है कि प्रिंसिपल परीक्षा कार्य में भी सहयोग नहीं करती थीं. इसके साथ ही सेवानिवृत्त व्याख्याता के अवकाश लेखा का निपटारा लंबित रखने और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार जैसी शिकायतें भी उनके खिलाफ सामने आ चुकी है.

संगीता नायर को निलंबन अवधि में जीवन निर्वाह भत्ता विभाग की ओर से मिलता रहेगा. विभाग की ओर से उनके खिलाफ शिकायतें शासन को भेजी गई थी. शासन की ओर से मिले निर्देशों के तहत ये कार्रवाई की गई. उनके खिलाफ लगातार छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें भी मिल रही थी: अरविंद मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के तहत कार्रवाई: शासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रिंसिपल संगीता नायर का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है. शिक्षा विभाग की ओर से आदेश में कहा गया है कि उनके कार्यों से विद्यालय में असंतोष का वातावरण बना और पद के दायित्व निर्वहन में घोर लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता बरती गई. इसी आधार पर उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत तत्काल निलंबित किया गया.
निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा: निलंबन अवधि में संगीता नायर का मुख्यालय कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा संभाग), दुर्ग तय किया गया है. निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा. जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने बताया कि ”शिकायतों की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई. मामले की विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी और दोष सिद्ध होने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई संभव है. लगातार मिल रही शिकायतों और छात्रों-अभिभावकों के विरोध को देखते हुए शासन ने यह कदम उठाया है”.


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