प्रमुख सचिव ने शासन को भेजा प्रस्ताव, PHE अधिकारियों का विरोध
भोपाल । ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य रूप से पेयजल का काम करने वाले लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ( PHE ) कि अब तक पूरी बॉडी एक वो विभाग के तौर पर अलग कार्य करती थी। लेकिन अब जल्दी ही लोग स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जिला पंचायत के अधीन कार्य करेंगा। इसके लिए प्रमुख सचिव ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है।

कई दशकों से ग्रामीण क्षेत्रों में बोरिंग मोटर लगाकर पेयजल की व्यवस्था करने वाले और पिछले 5- 6 वर्षों से केंद्र सरकार की ग्रामीण क्षेत्रों में “जल जीवन मिशन” योजना का क्रियान्वयन करने वाले लोग स्वस्थ यंत्र की विभाग का स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त करने की तैयारी की जा रही है। दरअसल मध्य प्रदेश में हजारों करोड़ों रुपए खर्च कर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की स्थाई व्यवस्था के लिए सरकार ने बड़े प्रोजेक्ट शुरू किया और विभाग ने इसका क्रियान्वयन कर गांव-गांव बोरिंग पानी की टंकी बनाने पाइपलाइन बिछाने जैसे काम किए हैं और भविष्य में पानी की आपूर्ति के लिए जल निगम तथा नगर और सिंचाई कैसी अन्य योजनाओं के माध्यम से जल आपूर्ति की जाएगी। ऐसे में विभाग के पास काम काम रहेगा जिसके चलते लोग स्वास्थ्य से आंतरिक विभाग को समेटकर प्रदेश के सभी जिलों में जिला पंचायत के अधीन किया जा रहा है। इसके लिए विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। पीएचई के प्रमुख सचिव ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है जिस पर मंथन के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उधर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों – इंजीनियरों द्वारा इसका विरोध भी किया जा रहा है।
अधिकार खत्म होंगे, यांत्रियो का विरोध
प्रदेश के सभी जिलों में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जिला पंचायत के अधीन कार्य करेंगे जिससे विभाग के कार्यपालिका यांत्रिक अधीक्षण यंत्री और मुख्य अभियंता ( संभागीय अधिकारी ) के मॉनिटरिंग, टैंडर तथा बिल भुगतान जेसे अधिकार प्रशासनिक अधिकारी ( जिला/ जनपद सीईओ ) के पास रहेंगे इसके चलते लोग स्वस्थ यांत्रिक के विभाग के इंजीनियरों द्वारा नई व्यवस्था का विरोध भी किया जा रहा है।


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