मामला हातोद में स्वास्थ्य विभाग की जमीन का, नगर पंचायत और प्रशासन बने तमाशबीन
नोटिस देकर बेफिक्र हुए अफसर माफिया के हौसले बुलंद
तहसीलदार, एसडीएम और सीएमओ पत्र-पत्र खेलते रहे और अस्पताल की शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 556 पर हो गया पक्का निर्माण
इंदौर। अधिकारियों की लापरवाही अथवा मिलीभगत के चलते इंदौर जिले में भू माफिया के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि रिक्त पड़ी भूमि ही नहीं स्कूल और अस्पताल जैसे परिसरों पर भी कब्जा हो रहा है। ऐसा ही मामला जिले के हातोद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी है। यहां शासकीय भूमि पर धीरे-धीरे लगातार कब्जा बढ़ता जा रहा है और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की जमीन पर पक्का निर्माण हो गया है।

सरकारी अम्ल की लापरवाही एवं मिलीभगत के चलते शासकीय मंदिर की भूमि चौकीदार के भूमि सीलिंग एक्ट की भूमि सहित अन्य शासकीय विभागों की जमीनों पर कब्जे हो चुके हैं। इंदौर शहर के समीप हातोद में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जहां प्राथमिक उपचार के लिए शासकीय अस्पताल चल रहा है और पूरे समय वहां अमला मौजूद रहता है बावजूद इसके परिसर में अवैध कब्जा हो गया है। दरअसल स्वास्थ्य विभाग की इस जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग द्वारा तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक शिकायत की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई जिसके चलते भू माफिया के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब सरकारी अस्पताल परीक्षण में पक्का निर्माण कर लिया है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नोटिस देने प्रशासन को शिकायत करने के बाद भी भूमाफियाओं ने सरकारी जमीन पर कब्जा कर पक्का का निर्माण कर लिए और वर्तमान में भी निर्माण कार्य चल रहा है। दरअसल विभागीय अधिकारियों ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की लेकिन हाथों तहसील कार्यालय से कब्जा करने वाले महेश चौकसे को केवल नोटिस दिया गया। प्रशासनिक कार्यालय से नोटिस नोटिस के खेल चलते रहे और भूमाफिया जमीन पर कब्जा करता रहा नौबत यहां तक आ गई कि मुख्य मार्ग की बेशकीमती शासकीय जमीन पर पक्का निर्माण कर दुकान- मकान बना लिया है। जबकि 4 वर्ष पहले 2022 से मामला प्रशासन की जानकारी में है। अस्पताल की जमीन पर महेश ने पक्का निर्माण कर लिया तो रवि ने अब गुमटी लगाकर एक नया कब्जा जमा लिया है।
कागजों पर दिखाई कार्रवाई
अस्पताल की शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 556 की 1.214 हेक्टेयर पर कब्ज की शिकायत के बाद हातोद तहसील कार्यालय द्वारा अप्रैल 2022 में अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस दिया गया, फिर मई 2022 में महेश चौकसे पर 2000 रुपए का अर्थ दंड लगाया और 24 घंटे में जगह खाली करने के निर्देश दिए। जमीन खाली नहीं करने पर अतिक्रमण रिमूवल की कार्रवाई करने के साथ जेल भेजने की कार्रवाई के लिए लिखा गया लेकिन यह कार्रवाई लिखने तक ही सीमित रह गई। कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति कर कब्जा करने वाले को सहयोग किया गया है।
अवैध निर्माण पर पक्की छत
सीएमओ संजय जैन का कहना है कि उन्होंने कार्रवाई की है तहसील कार्यालय से भी कार्रवाई करने की बात की जा रही है जबकि मौके से कब्जा नहीं हटाया गया और स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि हाल ही में अवैध कब्जा कर निर्माण करने वाले ने वहां हो रहे भवन निर्माण में पक्की छत भी डाल दी है और यह सब नगर पंचायत के दर्जन भर प्रतिनिधियों, भवन अधिकारी, सीएमओ, तहसीलदार और एसडीएम की नाक के नीचे हुआ है।
सवाल यह है कि कौन है जो माफियाओं का संरक्षक बना हुआ है ? क्यों इन्हें जेल की सलाखों में नहीं डाला जाता ?


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