मामला 2014 में शहर में शामिल हुई पंचायत क्षेत्रों का
बेक डेट के नक्शे दिखाकर चल रहा है बिल्डरों का धंधा
इंदौर। 12 वर्ष पहले 2014 में शहर में शामिल हो चुके गांव वाले क्षेत्रों में बिल्डरों का पुरानी तारीख के पंचायतों के नक्शे से मकान बनाकर बेचने का गोरखधंधा अब भी जारी है। शहर में चारों तरफ धड़ले से इस तरह के निर्माण चल रहे हैं, जिनसे पूछताछ करने पर नगर निगम का नक्शा नहीं मिला। पंचायतों के पंचायतो के नक्शे से काम चल रहा है जबकि पंचायतो के अधिकार 2014 में ही खत्म हो चुके हैं।
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नगर निगम के झोन क्रमांक 1, 13, 15, 16, 19 और 17 सहित अन्य झोन क्षेत्रों में शहर के आसपास के 29 गांव शामिल किए गए थे। इन गांव के नगर निगम में शामिल होने के बाद भी यहां करीब 2 वर्ष तक खुलेआम सभी निर्माण पंचायत के अनुमति पर चल रहे थे। हालांकि शहर में विलय के बाद किसी भी नवीन निर्माण के लिए नगर निगम ही अधिकृत है लेकिन प्रॉपर्टी और कंस्ट्रक्शन का कारोबार करने वालो ने बंद हुई पंचायतो के पुराने दस्तावेजों का उपयोग कर जमकर धंधा चमकाया है और कुछ लोग तो अब भी पुरानी तारीख की पंचायत की अनुमति पर मकान बनाकर बेच रहे हैं। नगर निगम का अमला निगरानी जरूर करता है लेकिन रोकने वाले जिम्मेदार भवन अधिकारी और भवन निरीक्षक से मिलीभगत कर निर्माण कर रहे हैं। ऐसे ने पुरानी पंचायत की अनुमति से हो रहा है अवैध निर्माण नगर निगम को भारी पड़ रहे हैं।
निगम को करोड़ों के राजस्व का नुकसान
भवन अनुज्ञा से नगर निगम को अच्छी खासी कमाई होती है और नई शहरी क्षेत्र में अधिक संख्या में निर्माण होने के कारण इस आई को बहुत अधिक बढ़ाना था लेकिन 29 गांव पंचायत में शामिल होने के बाद भी भवन अनुज्ञा से मिलने वाली राशि औसत वृद्धि कम हुई है। नगर निगम को पंचायत की पुरानी अनुमति पर हो रहा है अवैध निर्माण से हर साल करोड़ों का नुकसान हो रहा है। औसत 1000 वर्गफीट की एक अनुमति पर नगर निगम को लगभग 2 लाख रूपए का राजस्व मिलता है।
एक वार्ड में अब भी 5-6 निर्माण
शहर में शामिल होने के 12 वर्ष बाद झोन क्रमांक 1 में बांगड़ा रोड की कुछ कालोनियों में बिना निगम की अनुज्ञा के निर्माण हो रहे हैं। “जनहित मीडिया” की टीम को एक वार्ड में ही 5-6 ऐसे निर्माण चलते मिले हैं। इस हिसाब से अंदाजा लगाए पूरे शहर में अब तक 200 से 250 से अधिक निर्माण पंचायतों की बेक डेट की अवैध अनुमति से हो रहे होंगे। जिससे नगर निगम को करोड़ों का नुकसान हो रहा है।
इनका कहना है
ये कालोनी अब नगर निगम सीमा में है और बिना नक्शा परमिशन के निर्माण हो रहा है तो कार्रवाई करेंगे। बीआई को निरीक्षण के लिए भेजता हूं।
आनंद रैदास, भवन अधिकारी झोन 1 इंदौर नगर निगम।


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