इंदौर। इंदौर और भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों के चलते मेट्रो में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन (AFC) सिस्टम का ठेका तुर्की की कंपनी से वापस लेकर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को सौंप दिया गया है। इसके अलावा, एलिवेटेड कॉरिडोर पर तकनीकी कार्यों के चलते मेट्रो का संचालन 25 जनवरी तक के लिए रोक दिया गया है।
तुर्की कंपनी ‘असीस गार्ड’ से क्यों छीना ठेका?
पहले फेयर कलेक्शन (टिकटिंग) की जिम्मेदारी तुर्की की कंपनी ‘असीस गार्ड’ के पास थी। भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और पाकिस्तान द्वारा तुर्की ड्रोन के इस्तेमाल की खबरों के बाद सुरक्षा कारणों से इस ठेके को निरस्त कर दिया गया। अब यह जिम्मा DMRC के पास है। फिलहाल यात्रियों को मैनुअल और कंप्यूटर आधारित टिकट दिए जा रहे थे, लेकिन जल्द ही दिल्ली मेट्रो की तर्ज पर ऑटोमैटिक सिस्टम लागू होगा।
15 से 25 जनवरी तक ‘मेगा ब्लॉक’:
एलिवेटेड कॉरिडोर पर शेष तकनीकी कार्यों और टेस्टिंग को पूरा करने के लिए ‘मेगा ब्लॉक’ लिया गया है। 15 जनवरी से 25 जनवरी तक गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर (6 किलोमीटर) के बीच मेट्रो का यात्री संचालन पूरी तरह बंद रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक के पूरे 17 किलोमीटर के कॉरिडोर को फरवरी-मार्च तक व्यावसायिक संचालन के लिए तैयार किया जाना है। इस दौरान सिग्नलिंग और टेलीकम्युनिकेशन का काम पूरा किया जाएगा।
अंडरग्राउंड रूट पर अब भी ‘संशय’
मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (MPMRCL) इंदौर के अंडरग्राउंड रूट को लेकर अभी भी अंतिम निर्णय नहीं ले पाया है।मुख्यमंत्री ने खजराना चौराहे से मेट्रो को अंडरग्राउंड करने की घोषणा की थी, लेकिन इसके लिए अभी कैबिनेट मंजूरी और पुराने एलिवेटेड टेंडरों को निरस्त करने की प्रक्रिया बाकी है। निर्णय लंबित होने के बावजूद एयरपोर्ट और रीगल चौराहा जैसे स्थानों पर स्टेशनों के लिए खुदाई का काम जारी है।


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