मीडिया विभाग के ‘टैलेंट हंट’ ने बढ़ाई जीतू पटवारी की मुश्किलें
भोपाल — मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक तालमेल और वर्चस्व की जंग एक बार फिर सड़क पर आ गई है। प्रदेश प्रवक्ताओं के चयन के लिए आयोजित ‘टैलेंट हंट’ कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना गहराया कि मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस इस्तीफे को नामंजूर कर दिया है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी को उजागर कर दिया है।
विवाद की जड़: एक कमेटी, दो समानांतर आदेश
विवाद की शुरुआत 9 दिसंबर को हुई जब संगठन प्रभारी संजय कामले ने 11 सदस्यीय टैलेंट हंट समिति का गठन किया।
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पहला टकराव: इस समिति में मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक का नाम शामिल नहीं था, जबकि विभाग के प्रभारी अभय तिवारी को मुख्य भूमिका दी गई थी।
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नायक का पलटवार: जवाब में 23 दिसंबर को मुकेश नायक ने अपनी ओर से एक नया आदेश जारी कर दिया, जिसमें उन्होंने अभय तिवारी को संयोजक और विधायक आरिफ मसूद को सह-संयोजक बनाकर काम बांट दिया।
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आदेश निरस्त: अभय तिवारी ने तुरंत नायक के आदेश को ‘अनधिकृत’ बताते हुए खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि यह समिति सीधे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अधीन है, न कि मीडिया विभाग के।

सोशल मीडिया पर फजीहत: ट्वीट कर हटाने पड़े
इस खींचतान का असर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी दिखा। मुकेश नायक द्वारा जारी सूची को जब एमपी कांग्रेस के आधिकारिक हैंडल और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ट्वीट कर बधाई दी, तो संगठन में खलबली मच गई। विवाद बढ़ता देख और आदेश की वैधानिकता पर सवाल उठने के बाद पार्टी और पटवारी दोनों को अपने ट्वीट डिलीट करने पड़े।
व्हाट्सएप ग्रुप से इस्तीफे तक का सफर
तनातनी इतनी बढ़ी कि विवाद पार्टी के इंटरनल व्हाट्सएप ग्रुप्स तक जा पहुँचा।
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अभय तिवारी और प्रवक्ता अभिनव बरोलिया को एक ग्रुप से रिमूव कर दिया गया।
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अपमानित महसूस करते हुए मुकेश नायक ने जीतू पटवारी को अपना इस्तीफा भेज दिया, जिसमें उन्होंने ‘नए लोगों को जगह देने’ का हवाला दिया।
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ताजा स्थिति: संगठन प्रभारी संजय कामले ने आधिकारिक पत्र जारी कर बताया कि प्रदेश अध्यक्ष ने मुकेश नायक का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।
संगठन की साख पर सवाल
विपक्ष के हमलों और जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस के लिए यह आंतरिक कलह किसी बड़े झटके से कम नहीं है। एक तरफ जहाँ भाजपा ‘वोटर लिस्ट’ (SIR) और ‘VB-G RAM G’ जैसे मुद्दों पर आक्रामक है, वहीं कांग्रेस का अपना मीडिया विभाग ही दो फाड़ नजर आ रहा है।
अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या जीतू पटवारी इस खींचतान को पूरी तरह शांत कर पाएंगे या ‘टैलेंट हंट’ का यह विवाद पार्टी की छवि को और नुकसान पहुँचाएगा।


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