DEO की कार्रवाई पर हाईकोर्ट का स्टे, कर्मचारियों को साल भर से वेतन नहीं
निवाड़ी/भोपाल — निवाड़ी जिले के शास्त्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नेगुवा से जुड़ा कथित 15 करोड़ 88 लाख रुपये का घोटाला अब कानूनी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की जांच और स्कूल प्रबंधन के दावों के बीच यह मामला अब जबलपुर हाईकोर्ट की चौखट पर है।
जहाँ एक ओर डीईओ ने नियुक्तियों को फर्जी बताकर गबन का आरोप लगाया है, वहीं हाईकोर्ट ने इस मामले में दर्ज होने वाली कार्रवाई पर स्थगन आदेश (स्टे) दे दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा लोकायुक्त में की गई शिकायत से हुई।
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DEO की जांच: जिला शिक्षा अधिकारी ने अपनी जांच रिपोर्ट में दावा किया कि विद्यालय ने कर्मचारियों की फर्जी नियुक्तियां दिखाकर वेतन के नाम पर ₹15.88 करोड़ का गबन किया है।
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फर्जीवाड़े का आरोप: डीईओ ने विद्यालय के संचालन और नियुक्तियों को फर्जी करार देते हुए मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए थे।
स्कूल प्रबंधन के तर्क: “शासन के आदेश से हुआ संविलियन”
विद्यालय के प्राचार्य राजेंद्र पाठक ने डीईओ की रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए इसे तथ्यों से परे बताया है।
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शासकीय दर्जा: प्राचार्य के अनुसार, वर्ष 2017 में मध्य प्रदेश सरकार ने 54 निजी स्कूलों को शासकीय घोषित किया था, जिसमें नेगुवा का यह स्कूल भी शामिल था।
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संविलियन: उसी वर्ष शासन के स्पष्ट आदेश से संविदा कर्मचारियों का संविलियन किया गया था।
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दस्तावेजों की सत्यता: प्राचार्य का दावा है कि जिन पत्रों को डीईओ फर्जी बता रहे हैं, उनकी जांच भोपाल स्थित आईटीआई से कराई गई है, जहाँ उन्हें सही पाया गया है।
54 परिवारों पर आर्थिक संकट
इस विवाद का सबसे दुखद पहलू स्कूल के 54 कर्मचारी हैं, जिन्हें पिछले एक वर्ष से वेतन नहीं मिला है।
“वेतन रोकने का कोई वैधानिक आदेश नहीं है, फिर भी भुगतान रोका गया है। हमारे परिवारों के सामने भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।” — पीड़ित कर्मचारी
प्रशासनिक रुख
मामले की जटिलता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ रोहित सक्सेना ने स्पष्ट किया है कि:
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एक समिति द्वारा मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
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न्यायालय (हाईकोर्ट) के निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
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प्रशासन से आवश्यक दस्तावेज मांगे गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही अगली वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, हाईकोर्ट के स्टे के बाद मामला जांच समितियों और फाइलों में उलझा हुआ है, जबकि स्कूल के कर्मचारी न्याय और अपने रुके हुए वेतन की बाट जोह रहे हैं।


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