5 मजदूर दबे, 4 की हालत गंभीर
छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश — वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के पेंच क्षेत्र में स्थित इकलहरा की बंद ओपन कास्ट खदान एक बार फिर अवैध उत्खनन का शिकार बनी, जिसमें एक बड़ा हादसा हो गया है। रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे अवैध रूप से कोयला निकाल रहे लगभग 15 लोगों के समूह पर अचानक पहाड़ी चट्टान ढह गई। हादसे में 5 मजदूर मलबे के नीचे दब गए, जिनमें से चार की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है।
हादसा और गंभीर स्थिति
यह दुर्घटना बड़कुही ओपन कास्ट खदान में हुई, जो उत्पादन बंद होने के बाद से कोयला माफिया की अवैध गतिविधियों का केंद्र बनी हुई है। खदान की गहराई और देर रात होने के कारण बचाव कार्य बेहद कठिन हो गया था।
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बचाव कार्य: मलबे में दबे मजदूरों को उनके अन्य साथी जान जोखिम में डालकर पत्थर हटाकर बाहर निकालते रहे।
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घायल: सभी घायलों को तत्काल छिंदवाड़ा जिला अस्पताल पहुंचाया गया।
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स्थिति:
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रिजवान खान (28): अत्यंत गंभीर स्थिति के चलते नागपुर मेडिकल कॉलेज रैफर किया गया है।
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कुनाल कोचे (23), शादाब खान (32) और साईना कुरैशी (25): इन तीनों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है और इनकी हालत भी गंभीर बताई जा रही है।
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पांचवा मजदूर: मलबे में दबे पांचवें मजदूर की स्थिति का पूरा विवरण अभी पुलिस द्वारा जारी नहीं किया गया है।
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अवैध गतिविधियों का केंद्र बनी खदान
स्थानीय लोगों का कहना है कि इकलहरा की यह खदान वर्षों से कोयला माफिया के नियंत्रण में है, जहाँ रात के समय मजदूरों से चोरी-छुपे खुदाई कराई जाती है।
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सुरक्षा नदारद: खदान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से नदारद है, और कमजोर चट्टानें होने के बावजूद लगातार उत्खनन जारी है।
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स्थानीय शिकायतें: स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे यह हादसा हुआ।
प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ:
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निरीक्षण: परासिया एसडीएम और तहसीलदार रविवार शाम करीब 5 बजे घटनास्थल पर पहुंचे और पूरी स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने खदान में फैले अवैध उत्खनन को एक गंभीर मुद्दा बताते हुए आवश्यक कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
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जांच: पुलिस टीम ने छिंदवाड़ा अस्पताल पहुंचकर घायलों के बयान लेने शुरू कर दिए हैं। पुलिस उच्च अधिकारियों को अवैध खनन गैंग और इसकी व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत रिपोर्ट भेज रही है।
यह हादसा एक बार फिर साबित करता है कि जिले की बंद खदानों में चल रहा अवैध उत्खनन किस तरह स्थानीय मजदूरों के जीवन को गंभीर जोखिम में डाल रहा है।


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