‘वोटर सप्रेशन’ रोकने के लिए आयोग सख्त कार्रवाई क्यों नहीं करता?
लखनऊ — समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर चुनाव आयोग (EC) की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आयोग पर मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी करने और नाम हटाने (वोटर सप्रेशन) जैसे कृत्यों को रोकने के लिए पर्याप्त सख्त कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है।
अखिलेश यादव ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब देश में विभिन्न चुनावों के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर विपक्षी दल लगातार चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
मुख्य आरोप: शिकायतों पर अनदेखी और ‘वोट चोरी’ को बढ़ावा
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी ने मतदाता सूची में हुई बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और जानबूझकर नाम हटाए जाने को लेकर पुख्ता सबूतों के साथ हलफनामे (Affidavits) भी चुनाव आयोग को सौंपे थे।
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कार्रवाई की मांग: अखिलेश यादव ने कहा कि आयोग ने उन शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे ‘वोट चोरी’ के ऐसे कृत्य जारी हैं।
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निष्पक्षता पर सवाल: उन्होंने कहा कि जब तक EC जानबूझकर वोट काटने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई (जैसे निलंबन या टर्मिनेशन) नहीं करेगा, तब तक यह ‘वोट चोरी’ की प्रवृत्ति नहीं रुकेगी।
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पुलिस की भूमिका: उन्होंने पुलिस अधिकारियों द्वारा मतदाताओं को वोट डालने से रोकने जैसी घटनाओं का भी हवाला दिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि एक संगठित प्रयास हो सकता है।
लोकतंत्र और विश्वसनीयता की चुनौती
अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को चुनौती देता है। उन्होंने जोर दिया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए आयोग को ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। उनका यह कदम यह संदेश देता है कि मतदाता सूची की शुद्धता और अधिकारियों की जवाबदेही ही निष्पक्ष चुनाव की नींव है।
फिलहाल, चुनाव आयोग की ओर से अखिलेश यादव के इन नवीनतम आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


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