मल्हारगंज में अंडरग्राउंड स्टेशन के खिलाफ स्थानीय निवासियों का प्रदर्शन; 42 घर और 150 परिवार प्रभावित
इंदौर — मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में महत्वाकांक्षी मेट्रो प्रोजेक्ट के विस्तार को लेकर स्थानीय निवासियों का विरोध तेज हो गया है। शहर के घनी आबादी वाले मल्हारगंज इलाके में छोटा गणपति मंदिर के पास प्रस्तावित किए गए अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन के खिलाफ सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी सीधे तौर पर मांग कर रहे हैं कि स्टेशन का स्थान बदला जाए, क्योंकि इसके निर्माण से उनके दशकों पुराने घर और रोज़ी-रोटी छिन जाएगी।
42 मकान अधिग्रहित करने की है योजना
मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने शहर के मुख्य कॉरिडोर—गांधी हॉल से एयरपोर्ट—के लिए मल्हारगंज में यह अंडरग्राउंड स्टेशन बनाने की योजना बनाई है। यह क्षेत्र शहर के सबसे पुराने और घने व्यावसायिक व आवासीय इलाकों में से एक है।
- प्रभावित संपत्ति: योजना के तहत, स्टेशन के निर्माण और उसके रास्ते के लिए 42 मकानों को अधिग्रहित (Acquire) किया जाना है।
- प्रभावित परिवार: इस कार्रवाई से लगभग 150 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित होंगे, जिन्हें विस्थापन का डर सता रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे यहाँ पीढ़ियों से रह रहे हैं और उनकी दुकानें ही उनकी रोज़ी-रोटी का एकमात्र साधन हैं।
विरोध का कारण: संवादहीनता और विस्थापन का डर
प्रदर्शन कर रहे निवासियों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वह विकास उन्हें अपने घरों की कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
- मुख्य शिकायत: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और स्थानीय प्रशासन ने इस संवेदनशील अधिग्रहण मुद्दे पर उनसे कोई चर्चा या संवाद नहीं किया और सीधे मकान हटाने का फैसला ले लिया।
- भावनात्मक जुड़ाव: कई परिवार यहाँ पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं, जिससे उनका भावनात्मक जुड़ाव है। उनका कहना है कि इस पुराने शहर में उन्हें अन्यत्र जगह मिलना असंभव है।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
मल्हारगंज के रहवासियों ने एकजुट होकर प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन का स्थान बदलने का फैसला नहीं लिया जाता, उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
- मांग: प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से वैकल्पिक स्थान पर स्टेशन बनाने की मांग की है।
- संकल्प: उन्होंने कहा कि वे अपने घरों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे, ताकि विकास भी हो और किसी का आशियाना भी न उजड़े।
फिलहाल, मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन या जिला प्रशासन की ओर से इस विरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के भविष्य के विस्तार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।


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