फलती-फूलती सत्तारूढ़ भाजपा में पद के नाम पर शुरू हुए कलह, अभी ग्रामीण क्षेत्र बाकी
कलह और विवाद से बचने 20 से अधिक नेताओं और दर्जन से अधिक जातियों को साधना पड़ेगा
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इंदौर। भारतीय जनता पार्टी में इंदौर शहर और जिले में इतनी नेता हो गए हैं कि सभी के समर्थकों को संगठन में जगह देने के लिए 20 से अधिक नेताओं के समर्थक शामिल करना होंगे और लगभग इतनी ही जातियों से भी समीकरण बैठाना पड़ेगा। तब जाकर बड़े नेताओ को संतुष्ट कर सकेंगे और इसके लिए नगर अध्यक्ष की टीम नहीं बल्कि जंबो (एस्ट्रा लार्ज ) कार्यकारिणी मजबूरी हो जाएगी।
शहर और प्रदेश से लेकर केंद्र तक सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का कुनबा कितना बड़ा हो गया है कि संगठन के पुराने स्ट्रक्चर में सभी नेताओं और जातियों का समीकरण बैठना आसान नहीं रह गया। सभी नेताओं और जातिगत समीकरण आसान नहीं रह गया है। इंदौर में सांसद मंत्रियों विधायकों और पूर्व विधायकों तथा महापौर सहित दो दर्जन से अधिक नेता ऐसे हैं जिनके अच्छे खासे समर्थक हैं और वह अपने समर्थकों को संगठन में पद दिलाने के लिए प्रयासरत भी हैं। यहां तक की राजनीति से सेवानिवृत सुमित्रा ताई और सत्तन गुरु के अलावा कभी कभार ही नजर आने वाले पूर्व अध्यक्ष कैलाश शर्मा के समर्थक भी पद की दौड़ में हैं। कुल मिलाकर इंदौर शहर में लगभग दो दर्जन ऐसे नेता हैं जिनके समर्थक पद की जुगाड लगा रहे थे और अब कार्यकारी घोषित होने से नगरी टीम में संभावना नहीं रही। हालांकि जीतू जिराती, तुलसी सिलावट मधु वर्मा और उषा ठाकुर जैसे नेताओं के समर्थकों के लिए ग्रामीण क्षेत्र में अभी संभावना है।
ये हैं इंदौर के प्रमुख नेता
इंदौर के बड़े और अधिक समर्थकों वाले नेताओं में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़, गोलू शुक्ला, उषा ठाकुर, महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा, मनोज पटेल, आकाश विजयवर्गीय, सुदर्शन गुप्ता, पुष्यमित्र भार्गव, जीतू जिराती, गौरव रणदीवे और राजेश सोनकर जैसे नेताओं के नाम शामिल है। जबकि सुमित्रा महाजन, पूर्व अध्यक्ष कैलाश शर्मा, गोपी नेमा, सत्यनारायण सत्तन, कांग्रेस छोड़कर आने वालों में संजय शुक्ला, विशाल पटेल, अंतर सिंह दरबार और राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त प्रताप करोसिया आदि के समर्थक भी हैं। हालांकि विजयवर्गीय, मेंदोला और गौड सहित अधिकांश के समर्थकों को नवाजा जा चुका है।
जातिगत समीकरण भी विवाद की जड़
मंगलवार को कार्यकारिणी की घोषणा के बाद एक और जहां खाती समाज ने भाजपा कार्यालय को उपद्रव कर दिया वही राजपूत समाज के 3 पदाधिकारी के सोशल मीडिया पर बधाई के साथ फोटो वायरल हो रहे हैं। इसका सीधा-सीधा मतलब है कि संगठन को जातिगत समीकरण भी साधना होंगे इसके लिए ब्राह्मण राजपूत जैन अग्रवाल माहेश्वरी खाती ठाकुर और बाल्मीकि समाज सहित दर्जनभर से अधिक ऐसे बहुसंख्यक समाज है जिन्हें स्थान नहीं मिलने पर नाराजगी झेलना पड़ सकता है।
ग्रामीण क्षेत्र भी चुनौती कम नहीं
टीम मिश्रा के बाद अब ग्रामीण क्षेत्र में टीम चावड़ा का गठन बाकी है। जिस तरह से नगर कार्यकारिणी के बाद विरोध और उपद्रव हुआ है उसके बाद अब इंदौर की जिला कार्यकारिणी का गठन में भी इसकी संभावनाएं प्रबल हो गई है।


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