मध्य प्रदेश की जबलपुर हाईकोर्ट ने बैतूल निवासी एक दंपति के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को समाप्त करते हुए पति पत्नी के बीच तलाक की मंजूरी दे दी है. जस्टिस विशाल धगट और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि पति-पत्नी पिछले 22 वर्षों से अलग रह रहे हैं और अब मेल-मिलाप की कोई संभावना शेष नहीं है. इसलिए इस स्थिति में विवाह को भंग करना ही न्यायोचित है और यह कहते हुए दोनों को तलाक की मंजूरी दे दी.
दरअसल, बैतूल निवासी निरंजन अग्रवाल का विवाह नागपुर निवासी नीला के साथ 7 फरवरी 1988 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था. प्रारंभिक वर्षों में संबंध ठीक रहे, लेकिन बाद में नीला ने अलग घर बसाने की जिद की और उसका व्यवहार अजीब होता चला गया. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वर्ष 2003 में नीला मायके चली गई और तब से पति-पत्नी का साथ छूट गया. निरंजन का आरोप था कि पत्नी मानसिक रोग स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित थी और यह तथ्य विवाह के समय छिपाया गया था.


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