मामला मेट्रो डिपो के पास 22 प्लॉट बेचने का, गांधीनगर संस्था के कर्ताधर्ताओं ने बेच खाई सरकारी जमीन
इंदौर ( जनहित मीडिया )। गांधीनगर में मेट्रो डिपो के पास मुख्य मार्ग पर गांधी नगर गृह निर्माण संस्था की ओट में छिपे माफियाओं द्वारा 22 प्लॉट बेचने के मामले मैं शिकायत स्थानीय अधिकारियों से लेकर भोपाल तक पहुंच गई। आयुक्त सहकारिता विभाग भोपाल से 17 जुलाई को उपयुक्त सहकारिता विभाग को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था, 15 दिन हो चुके, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।
जिला प्रशासन ने एक दिन पहले ही लगभग 5.50 करोड़ की सरकारी जमीन कोमुक्त कराया है। लेकिन गृह निर्माण संस्था की आड़ लेकर करोड़ो की शासकीय जमीन ठिकाने लगाने वालो की लगातार शिकायत, कई बार की जांच पड़ताल, विभागों की आपत्ति और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। गांधीनगर गृह निर्माण संस्था को जो सरकारी खरे कभी आवंटन ही नहीं हुए उन पर भी संस्था में बैठे माफिया होने कब्जा कर प्लांट भेज दिए। ऐसा एक मामला इंदौर मेट्रो को आवंटित भूमि सर्वे क्रमांक 307 का है। उक्त सर्वे की 2.100 हेक्टेयर जमीन मेट्रो कावंटित हो गई जबकि शेष बची 0.516 हेक्टेयर जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और इसी जमीन पर गांधी नगर संस्था के प्रबंधक एवं संचालकों ने 22 प्लॉट बेच खाए।
3 बार आदेश फिर क्यों नहीं होती कार्रवाई
बिजासन से गांधीनगर तरफ जाने वाले में मेन रोड पर बेचे गए प्राइम लोकेशन के 22 प्लांट को लेकर पूर्व में की गई शिकायत के बाद विभागीय जांच में पाया गया कि यह जमीन संस्था को आवंटित नहीं है और संस्था द्वारा किया गया आवंटन गलत है। लेकिन अब तक 22 प्लॉट मुक्त कराने की कार्रवाई नहीं की गई। हाल ही मे 17 जुलाई 2026 को आयुक्त सहकारिता भोपाल कार्यालय से उपायुक्त सहकारिता विभाग इंदौर को एक पत्र भेजा गया है जिसमें 15 दिवस में कार्रवाई कर अवगत कराने के लिए लिखा है। इसके पहले भी 2 बार इस मामले में स्पष्ट हो चुका है कि जमीन संस्था की नहीं है। फिर कार्रवाई क्यों नहीं होती ?
जो जमीन आवंटित नहीं वह भी बेच खाई
गांधीनगर संस्था को छोटा बांगर्डा का सर्वे क्रमांक 103 और बड़ा बांगर्डा का सर्वे क्रमांक 305 एवं 307 की जमीन कभी आवंटित नहीं की गई बावजूद इसके फूलचंद पांडे गैंग ने उक्त शासकीय जमीनों पर प्लांट बेच खाए। भूखंडों का पूरा पैसा संस्था के खाते में जमा नहीं होता।
इनका कहना है
जानकारी नहीं है, अभी कलेक्टर कार्यालय मीटिंग में हूं।
– मनोज जायसवाल उपायुक्त सहकारिता इंदौर।
( कुल मिलाकर आयुक्त के आदेश पर कार्रवाई नहीं की, इसलिए कोई जवाब भी नहीं है।)

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