नक्सल ऑपरेशन को DSP ट्रेनिंग में पढ़ाया जाता है मॉडल केस
भोपाल/बालाघाट — मध्य प्रदेश पुलिस ने अपने सबसे बहादुर और कुशल अधिकारियों में से एक, निरीक्षक आशीष शर्मा को खो दिया। हॉक फोर्स में तैनात निरीक्षक आशीष शर्मा 19 नवंबर 2025 की सुबह बालाघाट क्षेत्र में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ (Naxal Encounter) में शहीद हो गए। उनकी पार्थिव देह को गुरुवार, 20 नवंबर 2025 को उनके पैतृक गांव लाया गया, जहाँ राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
शहीद को अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब
शहीद आशीष शर्मा की पार्थिव देह दोपहर को जब गांव पहुँची, तो उन्हें आखिरी सैल्यूट करने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।
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श्रद्धांजलि: लोगों ने देशभक्ति और गर्व की भावनाओं के साथ ”आशीष शर्मा जिंदाबाद…” और ”जब तक सूरज चांद रहेगा, आशीष तेरा नाम रहेगा…” के नारों से आसमान गूंजा दिया।
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अंतिम संस्कार: पूरे सम्मान और गर्व के साथ शहीद बेटे का अंतिम संस्कार किया गया।

नक्सल ऑपरेशन के ‘मॉडल केस’
शहीद आशीष शर्मा अपने साहसी और रणनीतिक नक्सल ऑपरेशनों के लिए जाने जाते थे। उनके नेतृत्व में हुए नक्सल ऑपरेशन (बालाघाट नक्सल एनकाउंटर) इतने सटीक और सफल थे कि उन्हें आज भी मध्य प्रदेश पुलिस बल में बेहतरीन पुलिसिंग का मॉडल माना जाता है।
डीएसपी संतोष पटेल द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार:
“नक्सल ऑपरेशन के दौरान आशीष शर्मा द्वारा किए गए एनकाउंटर बेहतरीन पुलिसिंग के मॉडल बन गए और उनकी पढ़ाई आज भी मध्य प्रदेश पुलिस के डीएसपी (DSP) स्तर के अधिकारी प्रशिक्षण में करते हैं।”
निरीक्षक आशीष शर्मा का बलिदान राज्य की सुरक्षा के प्रति पुलिस बल के समर्पण को दर्शाता है। उनकी बहादुरी और रणनीति पुलिस अधिकारियों की नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।


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