20 वर्षों से नहीं हुआ ऑडिट, बिना जांच के 4 बार हुए चुनाव; जमीन में भी बड़ी गड़बड़ी
इंदौर। इंदौर की सबसे बड़ी और पुरानी गृह निर्माण संस्थाओं में से एक, गांधीनगर गृह निर्माण संस्था, गंभीर अनियमितताओं के घेरे में आ गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस संस्था का पिछले 20 वर्षों से ऑडिट नहीं करवाया गया है, जबकि संस्था में अन्य सभी कार्य धड़ल्ले से चल रहे हैं।
यह स्थिति संस्था की वित्तीय पारदर्शिता और संचालन पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि इतने लंबे समय तक ऑडिट न होना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। ऑडिट न होने के बावजूद संस्था में पिछले 20 वर्षों में संस्था में चार बार चुनाव हो चुके हैं। नियमानुसार, किसी भी संस्था में बिना ऑडिट और खातों के स्पष्टीकरण के चुनाव नहीं कराए जा सकते। इसके अलावा आसपास की खाली पड़ी जमीनों को भी ठिकाने लगाने का काम किया जा रहा है।

प्रबंधक का कब्जा
संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार संस्था के अध्यक्ष और संचालक निर्णय करता होते हैं लेकिन इस संस्था में लंबे समय से काबिज प्रबंधक पांडे का इस कदर कब्जा है कि संचालक मंडल इसकी कठपुतली है। प्रबंधक सर्वेसर्वा होने से संस्था में अनियमितताएं जारी हैं और सारे काम नियमों को ताक पर रखा जा रहा है।
किसी के पास नहीं हिसाब
ऑडिट न होना गंभीर उल्लंघन
गृह निर्माण संस्थाओं के नियम और प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि सदस्यों के हितों की सुरक्षा के लिए वार्षिक ऑडिट अनिवार्य है। 20 वर्षों तक ऑडिट न होने का मतलब है कि संस्था के वित्तीय लेनदेन, आय-व्यय, और प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह से भ्रष्ट व्यवस्था के हाथ में है।
कैसे बनाए नए सदस्य
संस्था में पीछे शमशान की तरफ पैदल पुल के पास और एरोड्रम रोड की तरफ नए सिरे से प्लांट बेचे जा रहे हैं। यहां प्लाट बेचने की अनुमति नहीं है। नक्शा परमिशन नहीं है बावजूद इसके पांडे का जमीन का धंधा जारी है।


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