जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ महीनों के भीतर कई आतंकवादियों ने घुसपैठ की कोशिश की है. इसके साथ ही सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की खबरें भी सामने आई हैं. चौंकाने वाली बात ये है कि ज्यादातर घटनाएं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में देखने को मिली हैं. यही कारण है कि इस बात ने सेना को परेशानी में डाल दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षाबलों खासकर सेना के लिए अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा. इसके साथ ही गुज्जर और बकरवाल जैसे समुदायों का विश्वास फिर से हासिल करना होगा, जिन्हें पहाड़ों की “आंख और कान” माना जाता है.
अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षाबलों और दोनों समुदायों के बीच अविश्वास बढ़ रहा है, जो कि सीमा सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है. इन समुदायों की आबादी करीब 23 लाख है, जोकि पहाड़ों के दुर्गम इलाकों और पहाड़ की हर एक छोटी-बड़ी जानकारी के लिए जाना जाता है.

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