टैंडर से आधे से भी कम में करवाए दर्जनों काम हुए या नहीं ?
घुस लेते पकड़ाए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की जांच हो तो करोड़ों के घपले उजागर होंगे
इंदौर। लोकायुक्त द्वारा पकड़े गए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की करतूत की जांच हो तो करोड़ों रुपए के गबन उजागर होगा। सड़क बना देने के बाद ठेकेदार का बिल पास करने के लिए जिन अधिकारियों ने रिश्वत मांगी थी उन्होंने कई टेंडर 50% से कम राशि में अपने पट्टो को दे दिए और बिना काम के भुगतान भी किया है। लोकायुक्त इस मामले की जांच करें तो विभाग में हुए कई घोटाले सामने आएंगे।

लोक निर्माण विभाग के तीन अधिकारियों को लोकायुक्त ने रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। एक सड़क का बिल पास करने के एवज में इन अधिकारियों ने 3.5 लाख रूपए की मांग की थी। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालिका यंत्री के जयदेव गौतम के कार्यालय से पिछले दो वर्षों में मेंटेनेंस और रंगाई पुताई के नाम पर कई टेंडर 50% से भी कम राशि में ऑफर हुए हैं। अर्थात विभाग ने जिस काम के लिए जो राशि तय की ठेकेदार ने उसे आधे से भी कम में कर दिया! 2 वर्षों में ऐसे 50 से अधिक काम भी जांच का विषय है।
इसे उदाहरण से समझे
जैसे लोक निर्माण विभाग ने किसी परिसर में सरकारी आवास की मरम्मत के लिए 20 लाख निर्धारित कर टैंडर बुलाए। बिजली संबंधी कार्य या रंगाई पुताई के लिए 8 लाख निर्धारित कर टैंडर बुलाए। इन कामों के लिए ठेकेदारों ने 55 से 60 % तक कम अर्थात 20 लाख का काम 7 से 8 लाख या 10 लाख रुपए में और 8 लाख का काम 3.50 से 4 लख रुपए में करने का प्रताव दिया, जिन्हें स्वीकृत कर काम करवाया जाता है जो अच्छी बात है। लेकिन सवाल यह है कि क्या विभाग में बैठे इंजीनियर उसे काम का सही आकलन नहीं कर पाते या बहुत कम दर पर काम लेकर ठेकेदारों ने वहां काम किया ही नहीं ? अथवा ये टेंडर बुलवाए इसलिए गए थे कि सिर्फ कागज पर काम दिखाकर और खाना पूर्ति कर सरकारी खजाने से पैसा हड़पना है।


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