कैसे होंगे सहकारी संस्थाओं के चुनाव ?
प्रदेश में 8000 से अधिक संस्थाओं के निर्वाचन लंबित
इंदौर/ भोपाल। सहकारी संस्थाओं में निर्वाचन कार्य करवाने के लिए भोपाल में पदस्थ निर्वाचन प्राधिकारी द्वारा आदेश जारी किया जाता है, लेकिन पिछले 5-6 महीना से विभाग में निर्वाचन प्राधिकारी नहीं है। अधिकारी नहीं होने से संस्थानों में निर्वाचन कार्यक्रम जारी नहीं हो पा रहे हैं और इंदौर भोपाल सहित पूरे प्रदेश की हजारों संस्थाओं के निर्वाचन कार्य लंबित हो गए हैं।

सहकारिता विभाग अंतर्गत इंदौर में 3000 से अधिक हैं। सहकारिता विभाग में प्रतिवर्ष इंदौर जिले में ही 500 से अधिक संस्थाओं के निर्वाचन करवाए जाते हैं। लेकिन पिछले 5-6 महीनों से सहकारिता विभाग में निर्वाचन अधिकारी नहीं होने के कारण किसी भी संस्था का चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है। सहकारिता विभाग में अकेले इंदौर जिलों में ही लगभग 200 से अधिक संस्थाओं के निर्वाचन कार्यक्रम पेंडिंग है। जिन संस्थाओं में दिसंबर या जनवरी में चुनाव होना था उनमें अब तक भी चुनाव नहीं हो सके। इतना ही नहीं इंदौर के अलावा भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, होशंगाबाद और सागर, सीहोर, उज्जैन, देवास, खंडवा और खरगोन सहित सभी जिलों में सहकारी संस्थाओं के चुनाव नहीं हो पा रहे हैं। ज्ञात रहे की भोपाल में पदस्थ निर्वाचन प्राधिकारी को जिले में पदस्थ सहकारिता उपायुक्त द्वारा निर्वाचन के लिए अनुशंसा की जाती है, जिसके बाद निर्वाचन प्राधिकारी द्वारा चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाता है। लेकिन पिछले 5-6 महीनो से निर्वाचन प्राधिकारी नहीं होने के कारण संस्थाओं के चुनाव रुके हुए हैं।
सभी संस्थाओं में चुनकर आते हैं प्रतिनिधि
सहकारिता विभाग में पंजीकृत सहकारी साख संस्था, गृह निर्माण संस्था, प्राथमिक उपभोक्ता संस्था, विपणन संस्था, दुग्ध उत्पादन संस्था, मत्स्य पालन संस्था, यातायात संस्था और बहुउद्देशीय संस्थाओं सहित सभी सहकारी संस्थाओं में चुनाव प्रक्रिया से ही संचालक एवं अध्यक्ष का चुनाव होता है।
बिगड़ रही है संस्थाओं की व्यवस्था
पूर्व में भी सहकारी संस्थाओ के चुनाव 1 साल तक विलंब हो रहे थे, लेकिन वर्तमान में निर्वाचन प्राधिकारी नहीं होने से संस्थाओं के चुनाव कार्यक्रम जारी होने की संभावना भी नहीं दिखती। ऐसे में लंबे समय तक बिना प्रतिनिधित्व के संस्थानों का संचालन अथवा एक प्रशासक के भरोसे कई संस्थाओं के संचालन से संस्थानों की व्यवस्था बिगड़ सकती है। विशेषकर साख संस्थाओं में नियमित कार्य होता है और समय पर चुनाव नहीं होने पर नियमित कार्य बाधित होने से संस्थाओं की स्थिति बिगड़ सकती है।


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