इंदौर| इंदौर में भिक्षावृत्ति मुक्त अभियान के तहत रेस्क्यू किए गए और रातों-रात ‘करोड़पति भिखारी’ के नाम से सुर्खियों में आए मांगीलाल की कहानी में एक बड़ा यू-टर्न आ गया है। जहाँ प्रशासन ने उनके पास आलीशान मकान और गाड़ियां होने का दावा किया था, वहीं अब उनके परिवार ने सामने आकर इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। परिजनों का कहना है कि मांगीलाल भीख नहीं मांगते, बल्कि वे सराफा बाजार में अपनी उधारी वसूलने जाते थे।
संपत्ति विवाद: ‘मकान मां का है, लोन भतीजा भरता है’-
प्रशासन ने दावा किया था कि मांगीलाल के पास तीन मकान, तीन ऑटो और एक कार है। इस पर मांगीलाल के भतीजे ने सफाई दी है: जिस तीन मंजिला इमारत को मांगीलाल का बताया जा रहा है, वह असल में उनकी मां के नाम पर है। भतीजे का कहना है कि इस मकान पर लोन चल रहा है, जिसकी किस्तें वह खुद भरते हैं और इसके पुख्ता कानूनी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। परिवार ने अन्य संपत्तियों और लग्जरी गाड़ियों के दावों को भी भ्रामक और गलत बताया है।
भीख नहीं, ब्याज का धंधा?
परिजनों ने मांगीलाल की दिनचर्या को लेकर भी प्रशासन के दावे को चुनौती दी है, मांगीलाल पहले राजमिस्त्री थे, लेकिन कुष्ठ रोग (Leprosy) के कारण शारीरिक रूप से अक्षमता आने पर उन्होंने काम छोड़ दिया वे सराफा के छोटे व्यापारियों और मजदूरों को पैसा उधार देते हैं। जिस दिन उन्हें पकड़ा गया, वे अपनी उधारी वसूलने ही गए थे। बीमारी के कारण वे पहियों वाले तख्ते (Cart) का इस्तेमाल करते हैं, जिसे देखकर लोगों ने उन्हें भिखारी समझ लिया और उनकी तस्वीरें गलत संदर्भ में वायरल कर दीं।
प्रशासन vs एनजीओ: क्या है सच?
इस मामले में अब दो अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं: अधिकारियों का दावा है कि मांगीलाल 2021 से भिक्षावृत्ति में लिप्त हैं और उन्होंने बाजार में लाखों रुपये ब्याज पर दे रखे हैं। संस्था की अध्यक्ष रूपाली जैन का मानना है कि मांगीलाल की पूरी संपत्ति को भीख की कमाई से जोड़ना गलत है। बीमारी और सामाजिक तिरस्कार भी उनकी इस हालत की वजह हो सकती है।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा है कि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


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