डायरिया से बीमार पड़े सैकड़ो लोग मौतें भी हुई, राजनीतिक बेशर्मी भी कम नहीं
इंदौर — शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में डायरिया (उल्टी-दस्त) ने पैर पसार लिए हैं। पिछले तीन दिनों के भीतर इलाके में चार लोगों की मौत होने से हड़कंप मच गया है। स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है, क्योंकि जहाँ एक ओर लोग अपनों को खो रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग अभी भी इन मौतों की आधिकारिक पुष्टि करने से कतरा रहा है। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 1 के भागीरथपुरा में लंबे समय से नर्मदा के नलों में दूषित पानी आ रहा है, जिससे लोग बीमार पड़ रहे थे। स्थानीय रहवासियों द्वारा बार-बार नगर निगम को शिकायत की गई, कई बार जोनल कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। अंतत: नगर निगम की ढीटाई और सरकार की अनसुनी के चलते एक बड़ा कांड हो गया और कई गरीबों की जान पर बन आई। दूषित पानी से डायरिया हुआ और लगभग 500 लोग अस्पताल पहुंच गए, दो दिनों में दो महिलाओ सहित तीन की मौत भी हो गई। वहीं दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग मौत का कारण स्पष्ट करने से बच रहा है तो बड़े अधिकारी और राजनेता भी मामले से पल्ला झाड़ने में लगे हुए हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने मौके पर पहुँचकर कमान संभाली है।

मौतों का सिलसिला और दहशत
बस्ती के लोगों के अनुसार, मरने वालों में तीन महिलाएं शामिल हैं। पीड़ितों ने बताया कि सभी को अचानक उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी।
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मृतकों की सूची: उमा कोरी और नंदलाल पाल (मंगलवार को मौत), उर्मिला यादव और सीमा प्रजापति (रविवार को मौत)।
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अस्पताल में भर्ती: पीड़ितों का इलाज वर्मा नर्सिंग होम, अरविंदो और एमवाय अस्पताल में चल रहा है।
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मरीजों की संख्या: डॉक्टरों के अनुसार, पिछले 5 दिनों से रोज़ाना 5 से 7 नए मरीज डायरिया के लक्षणों के साथ आ रहे हैं।
प्रशासन की लापरवाही पर फूटा गुस्सा
स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि लंबे समय से नलों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा था। कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम ने ध्यान नहीं दिया।
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नेताओं का घेराव: आक्रोशित लोग अपने बीमार परिजनों को लेकर स्थानीय नेताओं के पास पहुँच गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
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अधिकारियों का तर्क: नर्मदा विभाग के अफसरों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में पानी दूषित नहीं मिला है, लेकिन विस्तृत जांच के लिए फिर से सैंपल लिए गए हैं।

मैदान में उतरा स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम
बढ़ते दबाव के बीच प्रशासन अब ‘युद्धस्तर’ पर कार्रवाई कर रहा है:
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डोर-टू-डोर सर्वे: स्वास्थ्य विभाग ने अमला बढ़ा दिया है। हर गली में डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है जो घर-घर जाकर जांच कर रही है और संदिग्ध मरीजों के सैंपल ले रही है।
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वैकल्पिक जलापूर्ति: दूषित पानी की आशंका को देखते हुए नल सप्लाई बंद कर दी गई है और पूरी बस्ती में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुँचाया जा रहा है।
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दवाइयों का वितरण: प्रभावित क्षेत्र में ओआरएस के पैकेट और क्लोरीन की गोलियां बांटी जा रही हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि पतले दस्त और उल्टी के कारण मरीजों के शरीर में पानी की भारी कमी (डिहाइड्रेशन) हो गई है। प्रशासन अब पानी की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि संक्रमण के वास्तविक स्रोत का पता लगाया जा सके।


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