दिग्विजय सिंह की सीहोर से पदयात्रा, ‘गांधी’ बनाम ‘सत्ता’ का महासंग्राम
सीहोर — केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलकर ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण’ (VB-G-RAM-G) किए जाने के फैसले पर मध्य प्रदेश में सियासी पारा चरम पर पहुँच गया है। इस बदलाव को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने 5 जनवरी 2026 से एक विशाल पदयात्रा का ऐलान किया है।
विशेष बात यह है कि इस आंदोलन की शुरुआत केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर से होगी।
“गांधी की आत्मा की लड़ाई”: दिग्विजय सिंह
सीहोर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए दिग्विजय सिंह ने इस आंदोलन को एक वैचारिक युद्ध करार दिया:
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विचारधारा पर प्रहार: सिंह ने कहा कि योजनाओं से गांधी का नाम मिटाना देश के इतिहास और उसकी आत्मा पर हमला है।
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अधिकारों का हनन: कांग्रेस का आरोप है कि नया कानून (VB-G-RAM-G) न केवल नाम बदलता है, बल्कि राज्यों पर वित्तीय बोझ (60:40 का अनुपात) बढ़ाकर इस क्रांतिकारी योजना को कमजोर करने की साजिश है।
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आंदोलन का केंद्र: पदयात्रा सीहोर जिले की ग्राम पंचायतों से होकर गुजरेगी, ताकि उस ग्रामीण भारत की आवाज बुलंद की जा सके जिसके लिए मनरेगा का निर्माण हुआ था।
विवाद का केंद्र: VB-G-RAM-G बिल
केंद्र सरकार ने हाल ही में संसद में नया बिल पेश कर मनरेगा को प्रतिस्थापित किया है। सरकार का तर्क है कि इससे रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए जा रहे हैं और यह ‘राम राज्य’ की अवधारणा के अनुरूप है।
कांग्रेस का पलटवार: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने इसे ‘BJP-RSS की साजिश’ बताया है। कांग्रेस का तर्क है कि महात्मा गांधी का नाम हटाना उनकी ‘ग्राम स्वराज’ की सोच को खत्म करना है।
पदयात्रा के मुख्य उद्देश्य
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नाम की बहाली: ‘महात्मा गांधी’ के नाम को योजना के साथ पुनः जोड़ने के लिए सरकार पर दबाव बनाना।
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जन जागरूकता: मजदूरों और किसानों को यह बताना कि कैसे नए नियमों से उनके ‘काम के कानूनी अधिकार’ पर संकट आ सकता है।
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सियासी संदेश: शिवराज सिंह चौहान के गढ़ से यात्रा शुरू कर कांग्रेस 2026 के आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत ‘गरीब-हितैषी’ नैरेटिव सेट करना चाहती है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती के अनुसार, पदयात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 5 जनवरी से शुरू होने वाला यह जन-आंदोलन गांव की पगडंडियों से शुरू होकर दिल्ली की सत्ता के गलियारों तक गूंजेगा।


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