रानी सराय में जनहित पार्टी का ‘चिपको आंदोलन’, पक्षियों के बसेरे पर संकट
इंदौर — इंदौर के हृदय स्थल रीगल चौराहे पर स्थित ऐतिहासिक रानी सराय परिसर में शनिवार (27 दिसंबर 2025) को पर्यावरण प्रेमियों और जनहित पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पेड़ों की कटाई के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया। मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशन और पार्किंग निर्माण के लिए वर्षों पुराने पेड़ों को काटने की तैयारी का विरोध करते हुए कार्यकर्ताओं ने ‘चिपको आंदोलन’ की तर्ज पर पेड़ों से चिपककर नारेबाजी की।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक धरोहर और हज़ारों पक्षियों के आशियाने को उजाड़ने की तैयारी है।
विरोध के मुख्य बिंदु: विकास बनाम विनाश
प्रदर्शन के दौरान जनहित पार्टी के अध्यक्ष अभय जैन और अन्य विशेषज्ञों ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए:
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दोहरी नीति का आरोप: अभय जैन ने कहा कि एक ओर सरकार “एक पेड़ माँ के नाम” जैसे अभियान चलाकर हरियाली का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर मेट्रो के नाम पर दशकों पुराने ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों को काटा जा रहा है। उन्होंने इसे ‘पर्यावरणीय पाखंड’ करार दिया।
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धरोहर पर संकट: 117 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत रानी सराय (1907), जो वर्तमान में पुलिस कमिश्नर कार्यालय है, इस निर्माण के कारण खतरे में है।
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पक्षियों का महाविनाश: रीगल चौराहा, रानी सराय और पुलिस मुख्यालय परिसर हज़ारों तोतों और अन्य पक्षियों का प्राकृतिक बसेरा है। अंडरग्राउंड निर्माण और एग्जिट-एंट्री पॉइंट के लिए इस हरित क्षेत्र को उजाड़ने से इन पक्षियों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
विशेषज्ञों की चेतावनी: “कागजी आश्वासन से नहीं बचेगा पर्यावरण”
संस्था नेचर वॉलंटियर्स के पक्षी विशेषज्ञ भालू मोंढे ने चेतावनी देते हुए कहा कि पक्षी पर्यावरण संतुलन की रीढ़ हैं। यदि उनके बसेरे उजड़े, तो केवल नए पौधे लगाने के वादों से उनका पुनर्वास संभव नहीं है। इसके लिए वर्षों पुराने फलदार वृक्षों की आवश्यकता होती है जो वर्तमान में यहाँ मौजूद हैं।
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मिट्टी के घोंसले: करुणा सागर संस्था ने वर्षों की मेहनत से यहाँ पक्षियों के लिए मिट्टी के घोंसले लगाए थे, जो अब मेट्रो अलाइनमेंट की भेंट चढ़ने वाले हैं।
मेट्रो प्रोजेक्ट का विस्तार और कानूनी पेच
मेट्रो के पहले चरण (गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर) के उद्घाटन के बाद अब 16 किलोमीटर के नए ट्रैक पर काम शुरू हुआ है।
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हाईकोर्ट में मामला: हाल ही में इंदौर हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर संज्ञान लेते हुए मेट्रो कॉर्पोरेशन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। याचिका में तर्क दिया गया है कि राजवाड़ा, रानी सराय और हाई कोर्ट जैसे ऐतिहासिक क्षेत्रों से मेट्रो गुजारने से पुरातात्विक धरोहरों को नुकसान हो सकता है।
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मेट्रो का पक्ष: मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि अंडरग्राउंड स्टेशन निर्माण के लिए पेड़ों का हटाना या प्रत्यारोपण (Transplantation) आवश्यक है, जिसके लिए नगर निगम से अनुमति ली गई है।
पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि मेट्रो के डिजाइन में बदलाव कर पेड़ों को नहीं बचाया गया, तो वे इस आंदोलन को और उग्र करेंगे।


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