इंदौर। इस वर्ष की आखिरी लोक अदालत 13 दिसंबर को आयोजित की गई थी जिसमें शासन के सभी राजस्व प्रकरण प्रकरणों का बड़ी संख्या में निराकरण हुआ। लोक अदालत में नगर निगम को भी अच्छा खासा राजस्व प्राप्त हुआ है। विवादित मामलों में पेनल्टी और सरचार्ज माफ करने से नगर निगम को 100 करोड़ की कमाई हुई है। नगर निगम की इस कमाई से लंबे समय अटके भुगतान का रास्ता खुल गया है। निगम का काम करने वाले ठेकेदारों को भी उम्मीद हो गई है कि अब उन्हें भी पैसा मिल सकेगा।
इस वर्ष 2025 की आखिरी लोक अदालत में नगर निगम को अच्छी खासी कमाई हो गई। नगर निगम के सभी झोनों से संपत्ति जलकर एवं जलकर सहित सभी करो में एक अरब रुपए से अधिक खजाने में आए हैं। सबसे अधिक नगर निगम के झोन 22 से 13 करोड़ 75 लाख रुपए का राजस्व आया। जबकि सबसे कम राजस्व झोन क्रमांक 6 में कुल 45 लाख रुपए का राजस्व आया। हालांकि बाढ़ नंगा की बस्तियां और औद्योगिक क्षेत्र वाले झोन 17 ने भी बजी मारी और विवादित प्रकरणों का निपटारा करते हुए नगर निगम के खजाने में 12 करोड़ 60 लाख रुपए से अधिक जमा करवाया। उसके बाद झोन 16 से 10 करोड़ 13 लाख रुपए, झोन क्रमांक 21 से 10 करोड़ 1 लाख और झोन क्रमांक से 9 करोड़ 56 लाख रुपए से अधिक और झोन क्रमांक 19 से लगभग 7 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। जबकि झोन 10 से 6.64 करोड़ रुपए से अधिक तो झोन 7 से 4.81 करोड़ रुपए का राजस्व आया। कुल मिलाकर 13 दिसंबर की इस लोकल अदालत ने 101 करोड, 78 लाख 62 हजार 364 रुपए शहर
सरकार के खजाने में आए।
22 हजार से अधिक रसीद
लोक अदालत में नगर निगम मुख्यालय और सभी झोनल कार्यालयों से 22 हजार 221 रसीद काटी गई। इस रसीद से बकाया संपत्ति कर का 99 करोड़ 07 लाख रुपए से अधिक तो जलकर का 2 करोड़ 48 लाख रुपए 41 हजार और ठोस अपशिष्ट ( कचरा प्रबंधन ) शुल्क का 22 लाख 24 हज़ार रुपए जमा किए गए। लोक अदालत में लगभग 22 हजार प्रकरणों का निपटारा किया गया।
अमले की मशक्कत सिस्टम ध्वस्त
लोक अदालत के दौरान एक और जहां नगर निगम केसा हे क ज अधिकारी को फिर कलेक्टर से ही विभाग का पूरा आमला अधिक से अधिक राशि जमा करवाने की मशक्कत कर रहा था और निगमायुक्त ने दूसरे कर्मचारियों को भी सहयोग के लिए लगा दिया। वहीं बेवसाइट बार बार समस्या उत्पन्न कर रही थी। सरकार पिछले साल से अब तक 2 वर्षों में भी समस्या का निराकरण नहीं कर सकी।

बिजली कंपनी के 6742 प्रकरण निराकृत, 2.30 करोड़ की छूट दी
पश्चिम क्षेत्र विद्युत कंपनी कंपनी को इस कैलेंडर वर्ष की आखिरी लोक अदालत में प्रकरणों के निराकरण में अच्छी सफलता मिली है। लोक अदालत में बिजली वितरण कंपनी के 6 हजार 742 प्रकरण निराकृत हुए हैं। 5 हज़ार 111 उपभोक्ताओं व बिजली उपयोग कर्ताओं को नियमानुसार 2.30 करोड़ रू की छूट दी गई है। बिजली कंपनी को 10.93 करोड़ रू का राजस्व प्राप्त हुआ है। इस दौरान सबसे ज़्यादा इंदौर जिले से करीब दो करोड़, देवास जिले से डेढ़ करोड़ रू से ज्यादा, उज्जैन जिले से करीब सवा करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। लोक अदालत में प्रकरणों के निराकरण हो सके इसलिए कंपनी 15 जिलों में हजारों नोटिस जारी किए थे।


Users Today : 7
Total Users : 13437
Views Today : 7
Total views : 23742
Who's Online : 0
Server Time : June 6, 2026 5:44 am