अयोध्या, उत्तर प्रदेश — 500 वर्षों की लंबी प्रतीक्षा और संघर्ष के बाद, अयोध्या नगरी का राम जन्मभूमि मंदिर मंगलवार, 25 नवंबर 2025 को तब संपूर्ण हो गया, जब भव्य और दिव्य मंदिर के शिखर पर आस्था की धर्म ध्वजा लहराई गई। यह ध्वज केवल वस्त्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण, ऊर्जा और पूर्णता का साक्षात प्रतीक है।
इस ऐतिहासिक और अलौकिक क्षण के साक्षी बनने के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत मौजूद थे।
धर्म ध्वजा का आरोहण और शुभ मुहूर्त
सनातन परंपरा में शिखर पर ध्वज का आरोहण मंदिर की पूर्णता का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है। यह ध्वजा मंदिर का रक्षक और ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक होती है।
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मुहूर्त: ध्वजा आरोहण के लिए 25 नवंबर 2025 को सुबह 11:58 बजे से दोपहर 12:30 बजे के बीच का मुहूर्त निकाला गया।
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शुभ योग: 32 मिनट का यह शुभ योग भगवान श्रीराम के जन्म नक्षत्र अभिजीत मुहूर्त से मेल खाता था।
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ऐतिहासिक तिथि: मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी का दिन चुना गया, जिसे विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है (इसी दिन भगवान श्रीराम और माता सीता का दिव्य विवाह हुआ था)।
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पूर्णता: इससे पहले, 22 जनवरी 2024 को भगवान श्रीराम बालक राम के रूप में और 5 जून 2025 को भगवान राम राजा के रूप में स्थापित किए गए थे।

ध्वजा और दंड की विशिष्टता
अस्थाई धागों से तैयार यह धर्म ध्वजा कई मायनों में अद्वितीय है:
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आकार और रंग: ध्वजा 22 गुणा 11 फीट की है, जिसका रंग चमकदार केसरिया है। इसे पैराशूट ग्रेड के तीन परत वाले कपड़े से बनाया गया है।
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दंड: ध्वजा को 161 फीट ऊँचे शिखर पर 42 फीट ऊँचे एक दंड के माध्यम से स्थापित किया गया है, जिस पर 21 किलो सोना मढ़ा गया है।
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संरक्षण: ध्वजा दंड पर बॉल बेयरिंग लगे हैं, जिससे यह हवा बदलने पर बिना उलझे पलट जाएगी। इसे भयानक तूफान में भी सुरक्षित रहने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
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पहचान चिह्न: ध्वजा पर प्रभु श्रीराम के सूर्यवंश का चिह्न, ॐ (ब्रह्मांड का द्योतक), और कोविदार वृक्ष का चिह्न अंकित है। इन चिह्नों को चार महीने के अध्ययन के बाद हाथ से बुना गया है।
कोविदार वृक्ष का महत्व:
अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव सिंह के अनुसार, कोविदार युक्त ध्वज अयोध्या की प्राचीन धरोहर रही है। वाल्मीकि रामायण के अयोध्या कांड में इसका उल्लेख है, जहाँ भरत की सेना कोविदार युक्त ध्वज के साथ आती दिखाई गई थी।
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: ‘पुनर्जागरण की ध्वजा’
ध्वजारोहण के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। यह धर्म ध्वजा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण की ध्वजा है।”
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आदर्श और लक्ष्य: पीएम मोदी ने कहा कि राम आदर्शों, अनुशासन और जीवन के सर्वोच्च चरित्र के प्रतीक हैं। उन्होंने देशवासियों से 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने भीतर के ‘राम’ को जगाने का आह्वान किया।
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गुलामी से मुक्ति: प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले 10 वर्षों में, भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
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विकसित भारत का रथ: पीएम मोदी ने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा, विकसित भारत की यात्रा को गति देने के लिए एक ऐसे रथ की आवश्यकता है जिसके पहिये वीरता और धैर्य हों, जिसका ध्वज सत्य और परम आचरण हो, और जिसकी लगाम क्षमा, करुणा और समता हों।


अन्य नेताओं के विचार
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मोहन भागवत (RSS प्रमुख): उन्होंने कहा, “आज हम सबके लिए सार्थकता का दिन है। इसके लिए जितने लोगों ने प्राण न्योछावर किए, उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी। आज मंदिर का ध्वजारोहण हो गया, रामराज्य का ध्वज आज फहरा गया है।” उन्होंने भगवा ध्वज पर अंकित कोविदार वृक्ष को रघुकुल की सत्ता का प्रतीक बताया, जो निस्वार्थ सेवा का संदेश देता है।
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योगी आदित्यनाथ (CM): उन्होंने कहा, “अयोध्या में बना भव्य राम मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि यह भगवा झंडा धर्म, ईमानदारी, सच्चाई, न्याय और ‘राष्ट्र धर्म’ का प्रतीक है।
इस ध्वजारोहण के साथ ही, राम मंदिर का निर्माण कार्य आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक रूप से पूर्ण हो गया है।


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