स्टे के बाद भी गांधी नगर में निर्माण जारी, नया गोदाम बनाया, प्लॉट समतल करने लगातार जेसीबी भी चल रही है
इंदौर, जनहित मीडिया। गांधीनगर संस्था के खिलाड़ियों ने मेट्रो रेल डिपो के पास की जमीन पर प्लॉट बेचने का मामला उजागर होने के बाद शासन की पहल पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है और यहां सभी तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। बावजूद इसके संस्था की आड़ में माफियाओ के निर्माण जारी है। रोक के बाद भी टीन शेड बनाने, नवनिर्माण करने और जमीन समतल करने का काम जारी है।
कई दशक पुरानी गांधी नगर संस्था के प्रबंधक और जमीनी जगलरो ने संस्था को इतना विवादित कर दिया है कि संस्था अखाड़ा बन गई और संस्था के प्रकरण स्थानीय न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गए हैं। ऐसे ही एक मामले में सुप्रीम कोर्ट का स्टे है जिसके अनुसार संस्था की जमीन पर निर्माण करना क्रय -विक्रय प्रतिबंधित किया है। बावजूद इसके संस्था के जादूगरों द्वारा छोटा बांगड़दा की तरफ प्लॉट काटने और नए निर्माण भी किए जा रहे हैं। सुपर कॉरिडोर के समीप सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर लगातार जेसीबी चलाकर प्लॉट समतल किया जा रहा है। इसके अलावा यह नया गोदाम भी बनाया गया है जो सीधे स्टे का उल्लंघ है।

पुरानी तारीख में काम जारी
सुप्रीम कोर्ट के स्टे का संस्था पर कोई असर नहीं है। संस्था में बैठे जादूगरों ने सारे काम का जारी रखे हैं और उस पर बड़ी कलाकारी यह कि सभी काम पुरानी तारीखों में किए जा रहे हैं।
पदाधिकारी मोहरे असली खिलाड़ी प्रबंधक
वैसे तो संस्था में चुनाव के बाद चुने हुए प्रतिनिधि हैं, लेकिन यह सारे प्रतिनिधि केवल मोहरा है संस्था में असली खिलाड़ी प्रबंधक फूलचंद उर्फ पीपी पांडे ही है। जमीन के खेल में महारत हासिल कर चुके पांडे ने 25 वर्षों में संस्था में इतनी धाक जमा ली है कि अपने घर के आधा दर्जन सदस्य शामिल कर कई भूखंड उनके नाम से हजम कर लिए हैं।
इनका कहना है
कोर्ट का स्टे संस्था और सरकार के लिए है, लेकिन हमने जिनको प्लॉट पहले दे दिए हैं वो काम कर सकते हैं।
-पीसी ( फूलचंद ) पाण्डेय अध्यक्ष
गांधी नगर गृह निर्माण संस्था।


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