फोटोकॉपी की दुकान वाला बनवा रहा पुरानी तारीख के फर्जी नक्शे
लीज शाखा में चल रहा है फर्जीवाड़ा, आंख मूंदे बेफिक्र बैठे अफसर
इंदौर। योजना क्रमांक 78 की लीज रिन्यू कराने के लिए पानी की टंकी के पास एक फोटोकॉपी की दुकान पर भ्रष्टाचार की डील हो रही है और नगर निगम तथा इंदौर विकास प्राधिकरण के अफसर बेफिक्र बैठे हैं। जबकि पिछले एक वर्ष में रिन्यू की गई लीज के दस्तावेजों की जांच और निगम के रिकॉर्ड से मिलान किया जाए तो बड़ा घोटाला उजागर होगा।
इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 78 की लीज अवधि खत्म होने के बाद अब रिलीज रिन्यू करने के लिए संपत्ति के दस्तावेजों के साथ निर्माण की अनुमति संबंधी दस्तावेज भी अनिवार्य है। लीज रिन्यू करवाने के लिए क्षेत्र में विकास प्राधिकरण और भूखंड धारकों के बीच फर्जीवाड़ा करने वालों ने पैठ बना ली है और पुरानी तारीख में नक्शा पास करवाने का आश्वासन देकर हजारों रुपए वसूले जा रहे है। दावा यह किया जा रहा है कि पूर्व में भी इस तरह के नक्शे बनवाकर लीज करवाई जा चुकी है। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान एक फोटोकॉपी की दुकान वाले ने एक नक्शा दिखाते हुए बताया कि यह नक्शा 2019 का है जरूर लेकिन इसे अभी बनाया गया है ऐसे ही पुरानी तारीख में नक्शा बनाकर प्लीज रिन्यू करवा देंगे। “जनहित मीडिया” द्वारा इसका खुलासा करने के बावजूद नगर निगम और इंदौर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने जांच पड़ताल करना जरूरी नहीं समझा और आज भी फोटोग्राफी की दुकान पर नगर निगम और आईडीए के अफसरो के काम की डील हो रही है। इसमें संपदा सखा के कर्मियों की मिली भगत के बिना यह संभव नहीं है। जबकि नगर निगम के रिकॉर्ड से मिलान किया जाए तो नक्शा पकड़ में आ सकता है लेकिन लापरवाही और मिलीभगत के चलते धड़ल्ले से पुरानी तारीख में फर्जी नक्शे बनाने का काम चल रहा है।
कहां से नक्शा बनवाता है शर्मा

स्कीम 78 में पानी टंकी के पीछे की तरफ आश्रम फोटोकॉपी चलाने वाले दिनेश शर्मा (टोपी ) द्वारा लीज रिन्यू करवाने के लिए पुरानी तारीख में मकान का नक्शा बनवाने की बात कही। सवाल यह है कि शर्मा वास्तव में नगर निगम के लोगों से मिली भगत कर पुरानी तारीख में नशे बनवाता है या बाहर ही कही तैयार किए जाते हैं। यह जांच का विषय है।
संपदा कर्मियों की मिलीभगत
जिस तरह से लीज रिन्यू करने के लिए दलाल खुलेआम फर्जीवाडा कर रहे हैं इससे स्पष्ट है कि इंदौर विकास प्राधिकरण की संपदा शाखा में बैठे कर्मचारियों की मिली भगत भी है और इसी लिए संपदाकर्मी बिना जांच पड़ताल के फाइल आगे बढ़ा देते हैं। बिना उनकी मिलीभगत के पिछले एक साल में हुआ फर्जीवाड़ा संभव नहीं था।


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