ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत, महापौर बोले- बस सेवा जारी रहेगी
इंदौर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद, इंदौर में बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर को हटाने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव की उपस्थिति में जीपीओ चौराहे से इस कार्य का शुभारंभ किया गया।
इस कदम से शहर के मुख्य मार्गों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
🚧 कॉरिडोर हटाने की प्रक्रिया
- समय: यातायात पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए कॉरिडोर हटाने का कार्य रात के समय सुरक्षा मानकों के अनुरूप किया जाएगा।
- प्रारंभिक चरण: शुरुआती चरण में बस स्टेशन, रेलिंग और जालियों को हटाया जा रहा है।
- लागत: महापौर भार्गव ने बताया कि यह कॉरिडोर 100 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनाया गया था और इसने अपने समय में शहर की बहुत सेवा की है।
🚌 नए स्वरूप में दिखेगा ट्रांसपोर्ट मॉडल
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्पष्ट किया कि बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने का मतलब बस सेवा को बंद करना नहीं है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव: “बस सेवा बंद नहीं हो रही है, बसें चलती रहेंगी, परंतु अब यह कॉरिडोर नए और सुंदर स्वरूप में दिखाई देगा।”
- पृष्ठभूमि: लगभग 11.47 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर वर्ष 2013 में एक आधुनिक परिवहन परियोजना के रूप में शुरू हुआ था। हालांकि, शहर में वाहनों की संख्या में तेज वृद्धि के कारण यह धीरे-धीरे ट्रैफिक जाम का कारण बनने लगा था।
- फोकस: बीआरटीएस हटाने के दौरान वैकल्पिक मार्गों और ट्रैफिक नियंत्रण की पूरी व्यवस्था की गई है ताकि नागरिकों को असुविधा न हो।
बीआरटीएस अब इंदौर के इतिहास का हिस्सा बन रहा है, लेकिन इसके स्थान पर शहर को मिलने वाला नया परिवहन स्वरूप भविष्य की सुविधा और सुगमता की नई पहचान बनेगा


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