विधानसभा सत्र की दोबारा शुरू हुई कार्यवाई में बाढ़ का मुद्दा उठा। इस दौरान “पंजाब का पुनर्वास” मुद्दे पर बोलते हुए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने हाल ही में आई बाढ़ों को लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि इस बार आई बाढ़ ने तबाही की सभी सीमाएं पार कर दीं। मंत्री ने बताया कि साल 1988 में 11 लाख 20 हजार क्यूसेक पानी आया था, लेकिन इस बार 14 लाख 11 हजार क्यूसेक पानी आया। इनमें से करीब 10 लाख क्यूसेक पानी खड्डों और नालों से बहकर पंजाब में तबाही का कारण बना।
गोयल ने कहा कि डैमों में पानी स्टोर करने या छोड़ने का निर्णय मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर आधारित होता है। लेकिन इस बार अनुमान से 717 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई, जिसके कारण हालात बेकाबू हो गए। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने पूरी कोशिश की कि डैमों से पानी सावधानीपूर्वक छोड़ा जाए, ताकि लोगों का नुकसान कम से कम हो। सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता डैमों को सुरक्षित रखना था। बारिश इतनी ज्यादा थी कि संभाला नहीं जा सका। इसके बावजूद भी पंजाब सरकार से हो सकता था वह पूरा जोर लगाकर किया। मंत्री ने आगे कहा कि इस मुश्किल घड़ी में सभी दलों के नेता जमीनी स्तर पर लोगों के बीच पहुंचे और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
उन्होंने नुकसान का ब्योरा देते हुए कहा कि बाढ़ से 2300 गांव प्रभावित हुए, 20 लाख लोग प्रभावित हुए, 5 लाख एकड़ फसल बर्बाद हुई, 59 लोगों की मौत हो गई और 7 लाख लोग बेघर हो गए। इसके अलावा 3200 स्कूल और 1400 अस्पताल व क्लीनिक भी क्षतिग्रस्त हुए। मंत्री गोयल ने यह भी कहा कि भाखड़ा-ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) का नियंत्रण पंजाब सरकार के पास होना चाहिए, क्योंकि बाढ़ के समय बोर्ड ने ऐसे फैसले नहीं लिए जिससे पंजाब की जनता को बचाया जा सके।


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