आज आपको भोपाल की एक महिला शिक्षक की कहानी बताते हैं, जो आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उन्होंने अपने संघर्ष और आत्मबल के दम पर न केवल शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि यह भी दिखा दिया कि सच्चे बदलाव की शुरुआत स्कूल से होती है. इनका नाम है डॉ. ऊषा खरे, जिन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. प्राचार्या के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जहांगीराबाद (भोपाल) को पूरी तरह बदल कर रख दिया.
सरकारी स्कूल में इतने बदलाव हुए कि आज यह तकनीकी सुविधाओं, स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल लर्निंग जैसे नवाचारों के लिए जाना जाता है. डॉ. ऊषा खरे की शिक्षकीय यात्रा 1985 में एक ऐसे गांव से शुरू हुई, जहां बिजली तक की सुविधा नहीं थी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और कर्तव्यपथ पर निरंतर आगे बढ़ती रहीं. यह समर्पण ही था जिसने उन्हें 2011 में भोपाल के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जहांगीराबाद में प्राचार्य की जिम्मेदारी तक पहुंचाया.


Users Today : 0
Total Users : 17228
Views Today :
Total views : 31380
Who's Online : 0
Server Time : September 16, 2026 12:52 am