3 दिन से नहीं हट रहे हैं, सड़क चौड़ीकरण में बाधक बने हनुमानजी
पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों ने भी हाथ खड़े किए
उज्जैन। उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान अंगद की तरह हनुमानजी नगर निगम के सामने खड़े हो गए हैं। नगर निगम ने रोड चौड़ी करने के लिए कई निर्माण तोड़ दिए। हनुमानजी का मंदिर भी तोड़ दिया, लेकिन जब मूर्ति हटाने की बारी आई तो हनुमान जी को हिला भी नहीं सके। दो दिन परेशान होने के बाद तीसरे दिन पुरातत्व की विवाह की तिमाही उन्होंने भी फिलहाल हाथ खड़े कर दिए।

कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण के दौरान 200 साल से अधिक पुराना खड़े हनुमानजी मंदिर को भी हटाया जा रहा था लेकिन कई प्रयासों के बावजूद पिछले तीन दिनों से नगर निगम इस मंदिर की हनुमान प्रतिमा को हिला नहीं सका है। नगर निगम ने मंदिर तोड़ दिया लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं मिली जिसके चलते नगर निगम ने वहां टेंट की व्यवस्था की और फिलहाल हनुमान जी टेंट में है। सहायता के लिए नगर निगम ने पुरातत्व विभाग को बुलाया पुरातत्व विभाग द्वारा कल जांच के बाद बताया गया कि यह मंदिर 200 साल से अधिक पुराना हो सकता है और यह एक विशेष तरह की लॉकिंग पद्धति से खड़े है। पुरातत्व विभाग ने भी फिलहाल हाथ खड़े कर दिए हैं और स्कैनिंग करने के बाद ही कुछ कर सकेंगे।
मूर्ति किस तरह से खड़ी है क्यों नहीं हिल रही है इस विषय में पुरातत्व विभाग भी कोई जवाब नहीं दे सका केंद्रीय टीम को बुलाने की बात कही जा रही है। अधिकारी ने चेतावनी दी है कि जबरदस्ती हटाने की कोशिश की तो मूर्ति का विग्रह बिगड़ सकता है। फिलहाल खड़े हनुमान जी यहां अंगद बने हुए हैं।
टैंट में है खड़े हनुमान
हनुमानजी को हटाने के लिए नगर निगम ने मंदिर तोड़ दिया, लेकिन मूर्ति नहीं हटी जिसके बाद अब 2 दिन से खड़े हनुमानजी के लिए टेंट लगाया गया है और फिलहाल वे टेंट में है। मूर्ति अन्य जगह स्थापित करने की योजना है, लेकिन यहां से हिली भी नहीं।

अब भी पानी में सिंगाजी की समाधि
निमाड़ के प्रसिद्ध संत सिंगाजी की समाधि स्थल से भी एक ऐसा ही किस्सा जुड़ा हुआ है। निमाड़ में यह बहुत प्रचलित है कि जब दिग्विजय सरकार में डैम बनाने के लिए हरसूद तहसील के कई गांव विस्थापित किए गए थे। तब संत सिंगाजी महाराज की समाधि स्थल भी विस्थापित करने की योजना थी लेकिन पूरी सरकार से वहां से नहीं मिले इसके बाद दिग्विजय सिंह ने इस समाधि स्थल को विकसित करने के लिए तुरंत राशि स्वीकृत की थी। अब भी सिंगाजी की समाधि अपनी जगह पर ही है।

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