TMC के बागी सांसदों के समर्थन से बढ़ी क्षेत्रीय पार्टी, अचानक चर्चा में आई NCPI , एक ही दिन में त्रिपुरा से बाहर अलग राज्य में वजूद में आई
जनहित मीडिया, नई दिल्ली। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी टूटने से भाजपा – कांग्रेस से पहले त्रिपुरा की एक क्षेत्रीय पार्टी NCPI को बड़ा फायदा हो गया है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से टूटकर अलग हुए नेताओं ने NCPI ज्वाइन कर ली है। हालांकि राजनीति की चाल सीधी नहीं होती, अचानक देशभर में चर्चा में आई NCPI भविष्य में आगे बढ़ेगी या ममता के नेताओं के सहयोग से इसे निपटाने की योजना है ? यह भविष्य के गर्त में छिपा है।
बंगाल की सत्ता जाने के बाद ममता की पार्टी TMC मैं फूट पड़ गई है और यह पार्टी तीन अलग-अलग खेमे हो गए हैं। इसका फायदा NDA या INDIA गठबंधन को कितना मिलेगा वह अपनी जगह है लेकिन इसका लाभ त्रिपुरा के एक छोटे से क्षेत्रीय दल “नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया” (NCPI) को जरूर मिल गया है। TMC के नेताओं का एक दल NCPI में शामिल हो गया है।
TMC के बागी सांसदों ने त्रिपुरा के इस छोटे क्षेत्रीय दल “नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया” को अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है। बताया जा रहा है कि इस पहल का उद्देश्य दल-बदल विरोधी कानून की बाधाओं से बचते हुए भाजपा-नेतृत्व वाले NDA को समर्थन प्रदान करने के लिए एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच तैयार करना है।
ज्ञात हो कि बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी TMC कम्युनिस्ट पार्टी के विरोध में कांग्रेस से टूटकर बनी थी। अब टीएमसी के सांसद अपनी पार्टी से अलग होकर नई पार्टी को बढ़ा रहे हैं। देखना यह है कि यह विलय वास्तव में NCPI को आगे बढ़ाएगा या…?


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