भागीरथपुरा की घटना के बाद कांग्रेस ने 23 वार्डों में जांच करवाई, 98 % जगह मिला दूषित पानी
इंदौर। इंदौर में बोरिंग और घरों में आने वाले नर्मदा के पानी की जांच में खुलासा हुआ कि पूरे शहर में गरीब स्लम बस्तियों से लेकर मध्यम वर्ग और संपन्न घरों तक में पीने का पानी पीने योग्य नहीं है। यदि लोग अपने घरों में पानी के लिए फिल्टर RO जैसी मशीनों का उपयोग नहीं करते हैं तो उन्हें मिलने वाला पानी डायरिया जैसी गंभीर बीमारिया देने वाला है।

यह खुलासा कांग्रेस द्वारा करवाई गई जांच में हुआ है। दरअसल कुछ माह पहले शहर के भगीरथ पूरा में दूषित पानी के कारण हुई मौतों के बाद कांग्रेस ने अलग-अलग क्षेत्र में पानी की जांच करवाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कहना है कि फिर से भगीरथपुरा जैसी कोई घटना ना हो कोई दूसरा भागीरथपुरा इंदौर में तैयार नहीं हो, इस उद्देश्य से शहर के 23 वार्डों में पानी के नमूने लिए और एक चलित लैब से तथा NABL से मान्यता प्राप्त लैब में जांच करवाई।
पानी के नमूनों की जांच में 98% सैंपल फेल हुए हैं। शहर के पानी में कहीं मलयुक्त बैक्टीरिया मिले तो कहीं मानव शरीर के लिए घातक रसायनों की अधिकता मिली। कांग्रेस ने पानी की जांच के लिए जियो टेगिंग, वीडियो फोटो और कई तरह के सबूत इकट्ठे कर प्रमाणिक जांच करवाई है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह जांच नगर निगम के अधिकारी और महापौर को भी भेजी जाएगी, ताकि जनता को शुद्ध पानी उपलब्ध करवाने के लिए अच्छे प्रयास हो सके।
कांग्रेस के पूर्व इंदौर प्रभारी इंजीनियर संजीव सक्सेना ने लेब की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि पानी में जानवरों और इंसानों के मल में पाए जाने वाले तत्व मिले हैं। अधिकांश स्थानों से लिए गए सैंपल में पानी इतना प्रदूषित मिला कि उसके सेवन से डायरिया जैसी गंभीर बीमारी की संभावना है।
सारे तालाब का पानी दूषित हो गए
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तालाबों को लेकर भी कहा कि इंदौर में पूर्व में नर्मदा से ज्यादा स्थानीय स्रोत पर निर्भरता थी। इंदौर शहर के आसपास पांच बड़े तालाब थे जिनसे शहर में पानी की पूर्ति की जाती थी। इन तालाबों का पानी बहुत साफ था जो देखने में ही नीला लगता था लेकिन अब पानी मत मिला और काला हो गया है तालाबों का पानी पीने योग्य नहीं बचा। पीथमपुर का कचरा धीरे-धीरे यशवंत सागर में पहुंच रहा है। अभी नहीं संभाले तो आने वाले 2-4 वर्ष में यशवंत सागर का पानी भी पीने योग्य नहीं रहेगा।


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