इंदौर| इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी (Contaminated Water) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार सुबह अरविंदो अस्पताल में एक और युवक की मौत के साथ ही इस त्रासदी में जान गंवाने वालों का आधिकारिक आंकड़ा 25 तक पहुंच गया है। प्रशासन की सख्ती और अधिकारियों के निलंबन के बावजूद अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
परिवार का एकमात्र सहारा छिन गया: बुधवार को दम तोड़ने वाले युवक का नाम हेमंत गायकवाड़ है। उनकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। हेमंत रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। वे घर में अकेले कमाने वाले थे। उनके पीछे उनकी पत्नी और चार बेटियां हैं, जो अभी पढ़ाई कर रही हैं। पिता की मौत से इन बेटियों के सिर से साया उठ गया है और परिवार के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद हेमंत को परदेशीपुरा के वर्मा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। तबीयत सुधरने पर छुट्टी मिल गई, लेकिन घर आते ही हालत फिर बिगड़ गई। 15 दिन पहले उन्हें दोबारा अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ आज सुबह उनकी सांसें थम गईं।
डराने वाले आंकड़े: 7 मरीज अभी भी ICU में: भागीरथपुरा त्रासदी अब एक बड़ी मानवीय आपदा का रूप ले चुकी है, 25 (इनमें एक 6 माह का बच्चा और 40 वर्ष से कम उम्र के 3 युवा शामिल हैं)। 1,000 से अधिक लोग दूषित पानी से बीमार हो चुके हैं। अभी भी 20 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 7 मरीज आईसीयू (ICU) में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
प्रशासन का एक्शन: मामले की गूंज दिल्ली तक पहुँचने और विपक्ष के भारी दबाव के बाद राज्य सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है, लापरवाही के आरोप में 3 अधिकारियों को निलंबित किया गया है। 3 अन्य अधिकारियों को उनकी वर्तमान जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। प्रदेश सरकार ने मामले की गहराई से जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है, जो यह पता लगाएगी कि सीवेज का पानी पेयजल लाइन में कैसे मिला।


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