ब्लड बैंक प्रभारी समेत 3 निलंबित, पूर्व सिविल सर्जन को नोटिस
सतना — मध्य प्रदेश के सतना जिले में एक मरीज को संक्रमित रक्त (Infected Blood) चढ़ाने के बेहद गंभीर मामले में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई की है। राज्य स्तरीय जांच समिति की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर ब्लड बैंक प्रभारी और दो लैब टेक्नीशियनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
यह कार्रवाई सीईओ आयुष्मान भारत डॉ. योगेश भरसट की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति की सिफारिशों पर की गई है।
निलंबन और विभागीय कार्रवाई
प्राथमिक जांच में घोर लापरवाही पाए जाने पर निम्नलिखित अधिकारियों पर गाज गिरी है:
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डॉ. देवेन्द्र पटेल: पैथोलॉजिस्ट एवं ब्लड बैंक प्रभारी (निलंबित)
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राम भाई त्रिपाठी: लैब टेक्नीशियन (निलंबित)
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नंदलाल पांडे: लैब टेक्नीशियन (निलंबित)
इसके साथ ही, जिला चिकित्सालय सतना के पूर्व सिविल सर्जन डॉ. मनोज शुक्ला की भूमिका की भी जांच की जा रही है। उन्हें कारण बताओ सूचना पत्र (Show Cause Notice) जारी कर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके विरुद्ध भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
जांच समिति का गठन और रिपोर्ट
संक्रमित खून चढ़ाने का मामला सामने आने के बाद सरकार ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया था:
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समिति गठन: 16 दिसम्बर को आईएएस डॉ. योगेश भरसट (संचालक, राज्य रक्ताधान परिषद – SBTC) की अध्यक्षता में सात सदस्यीय राज्य स्तरीय समिति बनाई गई थी।
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त्वरित कार्रवाई: समिति ने मामले की बारीकी से जांच की और अपनी प्रीलिमिनरी रिपोर्ट (Preliminary Report) सौंपी, जिसके तुरंत बाद यह निलंबन आदेश जारी किए गए।
इस घटना ने जिला अस्पताल की सुरक्षा प्रणाली और ब्लड बैंक के प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में इस तरह की जानलेवा लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


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