जहां चार मंजिला इमारते वे खाली प्लाट का संपत्ति कर जमा कर रहे हैं
इंदौर नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए शुरू किए पायलट प्रोजेक्ट में अड़ंगा आने से पहले जिन संपत्तियों का जांच हुई उनमें एक वर्ष में 3.5 करोड़ की चोरी सामने आई थी, विवाद कर उलझाया
इंदौर ( मंगल सिंह राजपूत )। नगर निगम की आय बढ़ाने के लिए निगम आयुक्त द्वारा करवाए गए सर्वे में अड़ंगा नहीं आता तो एक वार्ड से नगर निगम को 20 से 25 करोड रुपए कमाई हो सकती थी और शहर में ऐसे 20 से अधिक वार्ड है जहां बड़ी-बड़ी संपत्तियां व्यावसायिक उपयोग की जा रही है। लेकिन उनका सही टैक्स एसेसमेंट नहीं है। अकेले वार्ड क्रमांक 74 की आधी संपत्तियों का सर्वे करने पर लगभग साढे तीन करोड़ रुपए की टैक्स चोरी आंकड़ा आया है। अर्थात एक वार्ड में एक साल में 7 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी हो रही है।
नगर निगम इंदौर का 7000 करोड़ का बजट है, लेकिन इसमें निगम की खुद की आय हजार करोड़ ही है। इस आय को बढ़ाने के लिए शुरू किए जाने वाले प्रयासों में हमारे प्रतिनिधि ही अड़ंगा लगाते हैं। पिछले दिनों दीपावली के पहले इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने संपत्ति कर के सही मूल्यांकन के लिए काम शुरू किया और वार्ड 74 ( भोलाराम उस्ताद मार्ग ) से इसकी शुरुआत की। आश्चर्यजनक रूप से इस एक वार्ड में ही आधी संपत्तियों का सर्वे करने के बाद लगभग साढे तीन करोड रुपए की टैक्स चोरी सामने आईं। राजस्व अमला अपना काम कर रहा था तभी एक नेताजी ने विवाद खड़ा किया और राजस्व अमले के काम में बाधा पहुंचाई जिसके बाद ऐसा माहौल बन गया कि सर्वे ही अधूरा रह गया। लेकिन इस सर्विस में आधे वार्ड में जिस तरह से टैक्स चोरी सामने आई उससे यह स्पष्ट हो गया कि सही तरीके से संपत्तियों का एसेसमेंट हो तो नगर निगम की आय डेढ़ गुना हो सकती है। मालूम हो कि वार्ड 74 में कई ऐसी संपत्तियां हैं जिनमें खाली भूखंड का टैक्स भरा जा रहा है जबकि वहां चार मंजिला ईमारते खड़ी है, जिनका व्यावसायिक उपयोग हो रहा है।

किस तरफ़ थे महापौर और क्यों ?
अवैध नल कनेक्शन को वैध करने के लिए महापौर ने अभियान चलाया और निगम की आय बढ़ाने बस्तियों में घर-घर अमले को भेजकर निम्न माध्यम वर्ग से 6000 रुपए की वसूली करवाई। अच्छा किया, लेकिन रसूखदारों के करोड़ों की टैक्स चोरी के मामले में वही महापौर अपने ही कर्मचारी-अधिकारियों के सामने खड़े थे। क्या महापौर अरबों रुपए की टैक्स चोरी के पीछे खड़े रसूखदारों के कॉकस के दबाव में हैं। क्या निगम को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ऐसे ही प्रयास कारगर है।
…तो 50 करोड़ से पिछड़ेंगे
इस वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में 2 माह से अधिक समय तक संपत्तियों का डेटा नहीं मिलने और बड़ी संपत्तियों के एसेसमेंट भी हो पाने से राजस्व वसूली पिछले वित्तीय वर्ष की अपेक्षा बहुत कम है। यदि आईडीए या इसी तरह की कोई बड़ी राशि नहीं मिली तो दिसंबर तक गत वर्ष की अपेक्षा लगभग 50 करोड़ से पिछड़ेंगे।
कैसे आत्मनिर्भर बनेंगे
केंद्र और राज्य सरकार से विभिन्न योजनाओं के लिए मिलने वाली राशि के अलावा नगरीय प्रशासन मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक कह चुके हैं कि नगरीय निकायों को अपनी आय बढ़ानी चाहिए। लेकिन जिन स्रोतों से आय हो सकती है वहां राजनीतिक दबाव के चलते वसूली नहीं हो पाती। ऐसे माहौल में नगर निगम की आय कैसे बढ़ेगी और निगम को कैसे आत्मनिर्भर बनाएंगे।
वार्ड 74 का समीकरण (आधा सर्वे)
| विवरण | संख्या / राशि |
| वार्ड में कुल संपत्ति | 11,300 से अधिक |
| कुल सर्वे किया गया | 5009 |
| जिनमें अंतर पाया गया | 2413 |
| क्षेत्रफल में अंतर की कुल मांग | ₹6 करोड़ 21 लाख 80 हज़ार |
| अंतर की राशि (1 वर्ष में) | ₹3 करोड़ 88 लाख 45 हज़ार |

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